कृषि विश्वविद्यालय के बघरा कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा मधुमक्खी पालन में हुए घोटाले की जांच रिपोर्ट डॉ. संजीव बालियान का मंत्रालय बदलते ही ठंडे बस्ते में डाल दी गई। जबकि रिपोर्ट में खुलासा हो चुका है कि प्रोजेक्ट मंत्री जी का था और उसमें घोटाला हुआ है। लेकिन कार्रवाई न होने पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
केंद्र सरकार द्वारा यह प्रोजेक्ट तत्कालीन केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कृषि विज्ञान केंद्र बघरा (मुजफ्फरनगर) को दिया था। जो केवीके प्रभारी डॉ. पीके सिंह की देखरेख में शुरू किया गया था। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से गांव में जो युवा बेरोजगार हैं, और काम करना चाहते हैं, उन्हें मधुमक्खी पालन, डेयरी पालन, शूकर पालन आदि से जोड़ा जाए। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक युवाओं को उपकरण और प्रशिक्षण दें।
इसके लिए बघरा क्षेत्र के दो गांव कुटबा और कुटबी का चयन किया गया था। जिसमें इस योजना का लाभ 21 किसानों को दिया जाना था। प्रोजेक्ट के माध्यम से किसानों को बी बॉक्स, वेइंग मशीन, पैकिंग का सामान समेत करीब 20 उपकरण दिए गए। जिनकी क्वालिटी बहुत खराब थी। आरोप लगे कि केवीके अधिकारियों और कृषि विवि के टेंडर में शामिल अधिकारियों ने मिलीभगत से ऐसी फर्म को टेंडर दे दिया, जिसने 4-5 हजार रुपये के सामान को 21-25 हजार रुपये में दिया। सीधे तौर पर चार गुना अधिक कीमत पर सामान दिया गया था।
सामान की क्वालिटी खराब होने पर जब किसानों ने विरोध किया और इसकी शिकायत पर डॉ. संजीव बालियान ने कृषि विवि के कुलपति को पत्र भेजकर जांच कराने को कहा था। कुलपति डॉ. गया प्रसाद ने इस मामले में जांच कमेटी गठित कर दी थी। कमेटी ने जांच कर अपनी रिपोर्ट भी कुलपति को सौंप दी। अब इस पर कार्रवाई का निर्णय कुलपति को लेना है। विवि के सूत्रों का कहना है कि डॉ. संजीव बालियान का मंत्रालय बदलते ही उनका दबाव भी विवि में कम हो गया है। जिस कारण से अभी तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट में हैं दोषी
मोदीपुरम। कुलपति डॉ. गया प्रसाद ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी बनाई थी। जिसमें अध्यक्ष डॉ. एसके सचान, सदस्य डॉ. बीआर सिंह, कमल खिलाड़ी, एसएन पांडेय को बनाया गया। कमेटी की रिपोर्ट में विवि से लेकर कृषि विज्ञान केंद्र के कर्मचारी और अधिकारी दोषी बताए गए। जिन पर कार्यवाही की तलवार लटकी है।