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मंथन, सवाल, सुझाव, निर्णय एक, हर सूरत में करेंगे पुनर्जीवित

Sun, 17 Sep 2017 10:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हिंडन को पुनर्जीवित करने के लिए आला अधिकारियों, स्वयं सेवी संगठनों, एनजीओ, किसानों के साथ आयुक्त सभागार में हुई लंबी बैठक में गहराई से मंथन हुआ। विभिन्न सवाल उठे तो उनके निराकरण के लिए जवाब दिए गए। कुल मिलाकर लब्बो लुआब यह निकला कि हर सूरत में हिंडन को निर्मल करना है। इसके लिए हिंडन के साथ ही उसकी सहायक नदियों का सीमांकन होगा। ऐसा प्रवाह रोकना ही होगा जो गंदगी को हिंडन तक ले जाता है। कमिश्नर ने साफ कहा कि यदि कोई हिंडन में गंदगी रोकने से न माने तो उसे डंडे की भाषा से रोको।
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शनिवार को आयुक्त सभागार में हुई इस बैठक में आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि सभी को मिलनकर हिंडन को पुनर्जीवित करना होगा। उन्होंने हिंडन व उसकी सहायक नदियों के सीमांकन कराने, अपने उत्प्रवाह को नदियों में डालने वाली औद्योगिक इकाइयों का डाटाबेस तैयार करने, अपना कचरा नालो में डालने वाली औद्योगिक इकाइयों पर 20 हजार रुपये का दंड लगाने को कहा गया।

ये मुख्य फैसले लिए गए
बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। मसलन नवंबर के प्रथम सप्ताह में हिंडन कांवड़ का आयोजन होगा। कमिश्नर ने कहा कि मेरठ से मेरी जिम्मेदारी है कि पचास हजार लोग इसमें शिरकत करेंगे। बाकी जिले दस दस हजार लोगों को जोड़ें। सभी एक एक लोटा जल हिंडन में लाकर डालेंगे। निर्मल हिंडन की लायब्रेरी बनेगी।
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बदले में दी जाएगी ग्राम सभा की जमीन
बैठक में तय हुआ कि हिंडन व उसकी सहायक नदियों के किनारे पर 300 मीटर के अंदर अगर किसान की जमीन है तो उस जमीन के बदले उसे ग्राम सभा की जमीन दी जा सकती है। इसके लिए सभी जिलाधिकारी ऐसे कृषकाें को चिह्नित करें। हिंडन व उसकी सहायक नदियों के एक किलोमीटर के अंदर तालाबों व रकबों को चिह्नित करें, जून 2018 तक कब्जा हटाकर उन्हें पुनर्जीवित करें। अतिक्रमित भूमि में रह रहे लोगों को कांशीराम योजना या अन्य योजनाओं के मकानों में शिफ्ट किया जा सकता है।

नोएडा में निकली तीस हेक्टेयर जमीन
हिंडन सीमांकन में सामने आया है कि गौतबुद्धनगर में तीस हेक्टेयर जमीन हिंडन किनारे सरकारी है। इसका अतिक्रमण हटाने को कहा गया। इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है।

कूड़े का निस्तारण
आयुक्त ने कहा कि कूड़े का निस्तारण जरूरी है। इसके लिए ऑर्गेनिक व इनऑर्गेनिक कूड़े को प्रथक-प्रथक करें। ऑर्गेनिक कूड़े को प्रत्येक दिन एक गड्ढा बनाकर उसमें डाले। इससे बायो कल्चर करें ताकि खाद बन जाए।  जिसका उपयोग किसानों द्वारा किया जा सकता है। मेरठ में इसकी शुरुआत तेजी से हो। हापुड़ रोड पर यह प्रयोग शुरू हो।

ये रहे बैठक में मौजूद
इस अवसर पर आयुक्त सहारनपुर दीपक अग्रवाल, जिलाधिकारी शामली इंद्र विक्रम सिंह, सीडीओ मेरठ आर्यका अखौरी, चीफ इंजीनियर कुलभूषण वार्ष्णेय, गौतमबुद्धनगर अनिल कुमार सिंह, मुजफ्फरनगर अंकित अग्रवाल, गाजियाबाद रमेश रंजन, अपर आयुक्त उद्योग राधेश्याम मिश्र, डीएफओ गौतमबुद्धनगर एचवी गिरीश, मुजफ्फरनगर सूरज, एडीएम प्रशासन सहारनपुर एसके दूबे, नीर फाउंडेशन के रमन कांत, कृषक भारतभूषण त्यागी, डब्लूआरजी की ऐना, इंडिया वाटर पार्टनरशिप की वीना खंडूरी, गाजियाबाद के विक्रांत आदि मौजूद रहे।

पौधरोपण है धीमा
हिंडन से जुडे जुड़े सातों जनपदों में 03 लाख 20 हजार पौधों का रोपण करने का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष मात्र 01 लाख 94 हजार 320 पौधे ही रोपे गए हैं। मेरठ में तो मात्र तीन हजार पौधे ही लगाए गए हैं। इसको लेकर कमिश्नर ने नाराजगी जताई

अन्य फैसले
हिंडन किनारे बसे 872 ग्रामों के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका हेल्थचार्ट बनेगा।
अक्तूबर अंत तक पौधरोपण होगा।
31 दिसंबर तक हिंडन तट के गांव ओडीएफ  होंगे तथा सभी औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषण ऑडिट एक माह में पूरा होगा।
हिंडन व उसकी सहायक नदियों के सीमांकन होगा।
नदी किनारे की बड़ी भूमि पर तालाब खोदे जाएंगे।
एनजीओ की सूची बनेगी जो यह जिम्मेदारी लेंगे वह कौन सा काम इस अभियान में करेंगे।
कितनी भूमि पर अतिक्रमण है इसका सत्यापन होगा, उसे कब्जामुक्त कराकर पौधरोपण होगा।
हिंडन किनारे के पंाच पांच बड़े किसानों को 30 सितंबर तक चिह्नित करें जो अपनी भूमि पर बाग या वन लगाना चाहते हैं। तथा ऐसे किसानों को ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए प्रेरित करेेें। इसकेलिए बुलंदशहर में यह खेती कर रहे किसानों के यहां 04 अक्तूबर को दौरा होगा।
पूर्वी यमन नहर तथा गंगनहर से हिंडन में पानी छोड़ें।
औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषण ऑडिट एक माह में पूरा करें। प्रदूषण फैला रही इंडस्ट्री करें बंद।

सवाल
कैसे पौधे लगाएं। ऐसे जिन्हें पानी की आवश्यकता कम हो या पॉपुलर या यूके लिप्टस जैसे पौधे।
ग्राउंड वाटर लेबल कम है। इसका ध्यान कैसे रखा जाए।
पौधरोपण के बाद रखरखाव कैसे होगा।
गांव-गांव मुहिम चलाने के लिए कार्यक्रम कब से शुरू होंगे।
यदि किसान अपनी जमीन में पौध रोपण भी करें और इसे आर्थिक आय का जरिया भी बनाए तो उसकी क्या मदद हो सकती है।

सुझाव
हिंडन किनारे तितली या नेचर पार्क डेवलप किए जाएं।
गांव में बड़े तालाब से पहले छोटे तालाब बनें जिनका पानी बड़े तालाब में जाए। इससे पानी का शुद्घिकरण स्वत: ही होगा।
हिंडन कोष में पैसा देने के लिए लोगों को और जागरूक किया जाए।
अभी तक 6. 27 करोड़ रुपये कोष में आया है। अन्य विभागों को भी लक्ष्य दिया जाए।
प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्री पर ज्यादा से ज्यादा जुर्माना लगाया जाए।

गाजियाबाद ने वसूले मात्र चार लाख
कमिश्नर ने पूछा कि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों से कितना दंड वसूला तो गाजियाबाद से आए अधिकारियों  ने जवाब दिया कि  तीन से चार लाख। कमिश्नर ने कहा कि यह चार करोड़ होना चाहिए था। आपके यहां सात नालाें का अपशिष्ट सीधा हिंडन में जा रहा है। इस पर अंकुश लगाओ।
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