बेटे की हत्या के मामले में इंसाफ की मांग के लिए वर्दी और मेडल सड़क पर रखकर धरना देते रिटायर्ड फौजी।
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देश की सुरक्षा करते गोली खाने वाले रिटायर फौजी महीपाल सिंह मेडल लौटाने पर मजबूर हो रहे हैं। इकलौते बेटे मनोज की हत्या होने के मामले में वह पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने अपनी पत्नी बलेश्वरी के साथ सड़क पर अपने मेडल और वर्दी रखकर न्याय मांगा। सिस्टम से सवाल किए कि मैं देश के लिए लड़ा, लेकिन मेरे बेटे के लिए कौन लड़ेगा।
यह बुजुर्ग दंपति बृहस्पतिवार दोपहर करीब दो बजे दिल्ली रोड पर सुपरटेक के सामने सड़क पर आकर बैठ गया। महीपाल अपने साथ अपनी फौज की वर्दी और सैन्य मेडल भी लाए थे, जो अपने सामने रख दिए। महीपाल के हाथ में तख्ती थी, जिस पर वह सिस्टम से सवाल पूछ रहे थे। महीपाल के अनुसार मैंने 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ लड़ाई लड़ी, लेकिन अब मेरे बेटे मनोज की लड़ाई कौन लडे़गा। वह नौ पैरा बटालियन में पैराशूट कमांडेंट थे। पाकिस्तान के साथ युद्ध में गोलियां खाईं। सेना ने उन्हें गोल्ड मेडल और ट्राफी दी। जिससे उनका सीना गर्व से ऊंचा हुआ, लेकिन आज वह अपने बेटे के हत्यारे को पकड़वाने के लिए चक्कर काट रहे हैं।
इस हत्याकांड का दूसरा आरोपी मोनू छह दिन बाद भी पुलिस नहीं पकड़ सकी, जबकि वह ही उसकी हत्या का मुख्य आरोपी है। उसे ही हत्या की सही वजह पता है। महीपाल ने बताया कि वह मेरठ में सेना के वेस्ट जोन के मुख्यालय भी गए और अधिकारियों से आप बीती बताई। अधिकारियों ने इस संबंध में डीएम और एसएसपी को पत्र लिखने की बात कही। उन्होंने एक्स आर्मी मैन हेल्पलाइन पर भी इसकी जानकारी दी। उधर, महीपाल के रिश्तेदार प्रियपाल सिंह आदि कई लोग एसएसपी कार्यालय पहुंचे और हत्यारोपी मोनू की गिरफ्तारी की मांग की। वहीं, रात करीब आठ बजे सीओ ब्रह्मपुरी रफीक अहमद पूठा गांव पहुंचकर पीड़ित परिजनों से मिले। महीपाल ने सीओ के सामने अपने पदक वापस करने का प्रस्ताव रख दिया। सीओ ने बताया कि दूसरे आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
हमें संतुष्ट करे पुलिस
महीपाल ने बताया कि पुलिस ने सस्पेंड सिपाही कपिल को पकड़कर केस खोल दिया, लेकिन उन्हें कपिल की शक्ल भी नहीं दिखाई। वह चाहते हैं कि पुलिस मोनू को जल्द पकड़े और हमारे सामने उससे पूछताछ करे। उन्हें अंदेशा है कि हत्या के पीछे कोई और भी है और उसकी साजिश पर ही मनोज को मारा गया है।