छावनी सर्कुलर रोड स्थित हारमनी लॉन में बृहस्पतिवार को साईं संध्या का आयोजन हुआ। मुंबई से आए पंकज उधास के भाई मनहर उधास ने साईं भजनों की प्रस्तुति से मंत्र मुग्ध कर दिया। ‘कर्मों का फल, ए बंदे तुझे भोगना पड़ेगा’ समेत 30 से अधिक भजन गाए।
पंडित राजेंद्र प्रसाद ने पूजन किया और यजमान ताराचंद पूरी व हिमांशु पुरी रहे। ‘साईं नाथ तेरे हजारों हाथ, जिसने तेरा नाम लिया’ भजन के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। इसके बाद ‘जिस साईं ने दर्द दिया, दवा भी वही साईं देगा’। कीपैड पर सुरेश टाले, पैड पर राजू, तबले पर मुशर्रफ, ढोलक पर अमित राठौर और वायलन पर कमलेश झाले ने सभी का मन मोह लिया। ‘रहमत कर दो र्साइं’ और ‘एक झोली में फूल खिले और एक झोली में कांटे’ भजन को दर्शकों ने खूब सराहा।
र्साइं आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सुनील कुमार, मास्टर रिशानपुरी, रमेश अरोड़ा, विजय भोला, गोपाल कृष्ण, डॉ. पंकज रतन, राकेश जैन, शिखर, डॉ. वीके त्यागी, युद्धवीर सिंह मौजूद रहे।
पुराने गानों को भुलाया नहीं जा सकता : मनहर उधास
विश्व विख्यात भजन गायक मनहर उधास पहली बार मेरठ में आए। मनहर उदास बॉलीवुड की कई पुरानी बड़ी फिल्मों में गाने गा चुके हैं। साथ ही वह गजल गायक भी हैं। मनहर द्वारा गाई गई र्साइं भक्ति की एलबम सभी की पसंदीदा है।
मनहर उधास ने कुरबानी का ‘हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे’, अभिमान का ‘लूटे कोई मन का नगर बन मेरा साथी’ और जान का ‘जान ओ मेरी जान’ जैसे गाने गाए हैं, जो आज भी लोगों की जुबां पर हैं।
मनहर उधास ने कहा कि आज तकनीक बदल गई है, लेकिन पुराने गानों के प्रति लोगों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वह र्साइं के 23 से अधिक गाने गा चुके हैं। पहले तकनीक ज्यादा अच्छी नहीं थी और सारी जिम्मेदारी गायक की ही होती थी, लेकिन अब बहुत कुछ बदल गया है।
आवाज में भी परिवर्तन करना संभव है। जेनरेशन बदल रही है तो नये तरीके से कार्य किया जा रहा है, लेकिन पुराने गानों को भुलाया नहीं जा सकता। मुकेश, रफी और लता आज भी उतने ही पसंद किए जाते हैं।