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ममता का साया छिना तो खून के रिश्ते हुए पानी

Thu, 30 Jun 2016 02:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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मां का साया छिना - फोटो : अमर उजाला
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 डेढ़ साल की बच्ची अंजलि से ममता का साया क्या छिना, सगे रिश्तेदारों का खून पानी हो गया। नानी ने विवाद की बात कहकर मासूम की परवरिश से किनारा कर लिया। वहीं दादी या दादा ने भी बच्ची को रखने से इंकार कर दिया है। कत्ल के दौरान यह बच्ची भी चाकू लगने से घायल हुई थी। जिसका फिलहाल उसकी बुआ उपचार करा रही है। बुआ ने कह दिया कि वह भी ज्यादा दिन तक बच्ची को नहीं रख सकती।
न्यू सैनिक कॉलोनी में मंगलवार को प्रमोद सिरोही ने अपनी पत्नी तान्या की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। पुलिस के अनुसार तान्या के अपने प्रेमी से संबंध थे। जिसको लेकर दंपति में विवाद चल रहा था। वारदात के बाद से प्रमोद फरार चल रहा है। इस घटना के बाद दंपति की बेटी अंजलि उर्फ एंजल एक तरह से अनाथ हो गई है। मां की हत्या हो चुकी है। पिता फरार है। पकड़ा जाएगा तो जेल जाएगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि इस मासूम की परवरिश कौन करेगा।
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अंजलि की नानी सुमन का कहना है कि वह बच्ची को अपने पास नहीं रखेगी। क्योंकि तान्या और प्रमोद में बच्ची को लेकर भी विवाद था। तान्या दूसरी शादी करना चाहती थी। जबकि प्रमोद विरोध कर रहा था। प्रमोद ने बच्ची को हर हाल में अपने पास रखने की बात कही थी। जबकि तान्या बच्ची को लेकर मायके आ गई थी। अब अगर हमने बच्ची को रखा तो डर है कि कहीं प्रमोद कोई नुकसान न पहुंचा दे। सुमन के अनुसार उन्होंने प्रमोद के परिजनों से संपर्क कर बच्ची ले जाने के लिए कहा। लेकिन उन्होंने भी इंकार कर दिया। फिलहाल बच्ची तान्या की बुआ के पास है। वही उसकी देखरेख और उपचार करा रही हैं। लेकिन उसने भी कह दिया है कि वह हमेशा उसे अपने पास नहीं रख सकती।

सूनी आंखों में मां की तलाश
यह अबोध नहीं जानती कि आखिर हुआ क्या है। उसे रोजाना प्यार करने वाले माता-पिता कल से उसे दिखाई नहीं दे रहे हैं। वह घर के आंगन में हर तरफ अपनी मां को तलाश कर रही है। भले वह कुछ बोल नहीं पाती। लेकिन सूनी आंखों में मां को तलाश के साथ खौफ भी साफ नजर आता है।  
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हत्यारोपी का नहीं लगा सुराग
पुलिस ने हत्यारोपी प्रमोद की गिरफ्तारी के लिए मेरठ से लेकर उसके गांव लौहाड़े गुलावठी बुलंदशहर तक दबिश दी। लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। एसओ कंकरखेड़ा यादराम यादव ने बताया कि आरोपी की तलाश में गंगानगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर आदि कई स्थानों पर दबिश दी गई। लेकिन उसका पता नहीं चल पाया है।
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