मूलचंद चौहान बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव के प्रेम और स्नेह को कभी नहीं भुला सकते। उन्होंने बताया 1977 में जब जनता पार्टी बनी थी। तब मुलायम सिंह यादव प्रदेश के सहकारिता मंत्री थे। उनका उनके पास तभी से आना-जाना शुरू हो गया था। 1993 में मुलायम सिंह यादव जनता पार्टी से अलग होकर उन्होंने 1993 में समाजवादी पार्टी बना ली थी।
मूलचंद चौहान के अनुसार जब वह एक बार चुनावी सभा के लिए मुलायम सिंह अफजलगढ़ जा रहे थे तब वह कुछ देर के लिए नौरंगाबाद रुके थे और उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने मुलायम सिंह यादव का स्वागत किया था।
मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में उन्होंने समाजवादी पार्टी में पार्टी का सच्चा सिपाही बनकर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर उन्हें कार्य करने का मौका मिला। इस सौभाग्य को वह कभी नहीं भुला सकते।
मुलायम सिंह यादव के प्रेम और आशीर्वाद के कारण ही उन्होंने जनपद बिजनौर में तमाम अप्रत्याशित विकास कार्य को गति देने का काम किया। जो आज भी प्रदेश के लोगों को अन्य जनपदों की तुलना में अलग ही चमकता है।
सच्चे समाजवादी थे मुलायम सिंह यादव- विधायक तसलीम अहमद
नजीबाबाद से समाजवादी पार्टी के विधायक हाजी तसलीम अहमद ने कहा कि मुलायम सिंह यादव सच्चे समाजवादी नेता थे। उनके निधन से प्रदेश ही नहीं पूरे देश की राजनीति को नुकसान पहुंचा है। राजनीति में बड़ा कद रखने वाले मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक कुशलता का यही परिचय है कि तीन बार मुख्यमंत्री, सात बार सांसद, आठ बार विधायक रहने के साथ मुलायम सिंह यादव ने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी देश का नेतृत्व किया।
नजीबाबाद से जुड़ी हैं नेता जी की चुनावी यादें
पूर्व मुख्यमंत्री और सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की नजीबाबाद से चुनावी यादें जुड़ी हुई हैं। वर्ष 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव नजीबाबाद में चुनावी सभाओं को संबोधित करने पहुंचे थे। वर्ष 2002 में मास्टर राम स्वरूप सिंह के लिए उन्होंने चुनाव प्रचार किया था, जबकि 2007 में उनके बेटे राजकुमार के लिए चुनाव प्रचार के लिए मुलायम सिंह यादव नजीबाबाद सरजमीं पहुंचे थे।
मास्टर रामस्वरूप तीन बार विधायक रहे। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मास्टर रामस्वरूप वर्ष 2002 विधानसभा चुनाव सपा गठबंधन से प्रत्याशी रहे।कासमियां इंटर कॉलेज में उन्होंने मास्टर राम स्वरूप सिंह के पक्ष में चुनाव सभा की थी। मुलायम सिंह यादव माकपा के रामस्वरूप सिंह की सादगी और ईमानदारी हमेशा प्रभावित थे।
तीन बार विधायक रहे मास्टर रामस्वरूप सिंह की मृत्यु के बाद मुलायम सिंह ने उनके पुत्र राजकुमार को नजीबाबाद से गठबंधन प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव के लिए उतारा था। 2007 में चुनावी सभा करने मुलायम सिंह यादव नजीबाबाद पहुंचे लेकिन राजकुमार विजयी नहीं हो सके।
पार्टी के समर्पित सिपाही थे मुलायम सिंह यादव- सपा नेता मुनव्वर अली
नजीबाबाद के वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता मुनव्वर अली समाजवादी पार्टी संगठन से पहले से मुलायम सिंह यादव के नजदीकी रहे। मुनव्वर अली बताते हैं कि रक्षा मंत्री और सहकारिता मंत्री पद पर रहते हुए मुलायम सिंह यादव उन्हें समाजवादी पार्टी संगठन को जनपद में मजबूत रखने के लिए प्रेरित करते रहे।
मुनव्वर बताते हैं मुलायम सिंह एक बार उनसे कहा था तुम जैसे युवाओं की जरूरत है लखनऊ आ जाओ। जब भी वे लखनऊ जाया करते थे मुलायम सिंह यादव नाम से उन्हें बुलाकर गले लगाया करते थे और नजीबाबाद और जिले के बारे में जानकारी लेते थे। उन्होंने कहा मुलायम सिंह के रूप में सपा और देश की राजनीति को हुई क्षति अपूरणीय है।