उत्तर प्रदेश के सीतापुर में महिला द्वारा पति को छोड़कर सहेली के साथ रहने और उससे संबंध बनाने के मामले में देवबंदी उलेमा ने इसे नाजायज और हराम अमल करार दिया है। उलमा का कहना है कि इस्लाम धर्म में इस प्रकार के अमल की कोई गुंजाइश ही नहीं है।
मसले को लेकर मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि इस्लाम में ऐसा कोई भी अमल नहीं है कि एक औरत दूसरी औरत और मर्द दूसरे मर्द के साथ मिया बीवी जैसा रिश्ता रखा। बल्कि इस तरह के रिश्ते को इस्लाम में नाजायज और हराम करार दिया गया है। उन्होंने कहा कि औरत और मर्द के लिए कुदरत ने कायदे कानून बनाए हुए हैं जिन पर अमल करके वह अपने जीवन को खुशी खुशी गुजार सकते हैं। मगर कुछ लोग कुदरती नियमों को दरकिनार कर रहे हैं जो अल्लाह के अजाब की वजह बनते हैं। औरत का औरत से और मर्द का मर्द से संबंध बनाना बहुत बड़ा गुनाह है। जो लोग ऐसा करते हैं वो अल्लाह की सख्त नाराजगी का शिकार होते हैं।