संवाद न्यूज एजेंसी
फलावदा। कस्बे के पुराना बस स्टैंड स्थित इमामबाड़ा ताजिमीया में बुधवार को मजलिस-ए-चेहल्लुम का आयोजन अकीदत और एहतराम के साथ किया गया। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर कर्बला के शहीदों, विशेष रूप से हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की।
मौलाना सय्यद जीशान हैदर रिजवी मुजफ्फरपुर बिहार ने बयान में कहा कि कर्बला का वाकया केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इन्सानियत, सब्र, त्याग, न्याय और सत्य की रक्षा का सबसे बड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय शहादत स्वीकार की, जिससे पूरी मानवता को हक और इन्साफ के रास्ते पर डटे रहने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने युवाओं से इमाम हुसैन की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
मजलिस में शारिब रिजवी महलका और ओन मोहम्मद फलावदा ने मर्सियाख्वानी कर कर्बला के दर्दनाक मंजर को भावपूर्ण अंदाज में पेश किया, जिससे माहौल गमगीन हो गया और अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद अंजुमन परचम-ए-गाजी फलावदा, अंजुमन हुसैनी मवाना तथा अंजुमन हुसैनी बातनौर के मायमदारों ने नौहाख्वानी और मातमपुरसी कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। मजलिस के समापन पर मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ कराई गई।
इस दौरान कार्यक्रम के आयोजक डाॅ. अली अब्बास रिजवी ने बताया कि जुलूस इमामबाड़ा से शुरू होकर मोहल्ला कुरैशियान, पुराना बस स्टैंड से वापस इमामबाड़े में जाकर संपन्न हुआ।