एक-एक पैसा जोड़कर सपनों का घरौंदा बनाने की योजना हो और उसमें महिलाओं की राय न ली जाए, ऐसा कभी हो सकता है क्या? परिवार के मुखिया हर बड़े काम में घर की महिलाओं की सलाह लेते हैं। घर में आधी आबादी का सिक्का चलता है। अब मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने भी उनकी राय लेने का प्लान बनाया है। आगामी आवासीय योजनाओं में एमडीए महिलाओं से यह जानेगा कि उनके सपनाें का घरौंदा कैसा हो? इतना ही नहीं, आवंटन में उनके के लिए आरक्षण पर भी विचार किया जा रहा है।
यह प्लान महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा। वहीं एमडीए की योजनाओें के प्रति महिलाओं की जागरूकता बढ़ाने का भी काम करेगा। दरअसल, एमडीए अधिकारी काफी समय से इस पर मंथन कर रहे थे कि किसी योजना में आवास बनें तो इसमें महिलाओं से भी यह पूछा जाए कि उनका घर कैसा हो? अधिकारियों का मानना है कि किसी भी भवन को घर महिलाएं ही बनाती हैं। पुरुषों के मुकाबले घर की महिला सदस्यों की भावनाएं अपने घर से ज्यादा मजबूती से जुड़ी होती हैं। यही कारण है कि आवास बनाने से पहले उनकी भी राय लेनी जरूरी है।
बता सकेंगी अपनी च्वाइस
महिलाओं से पूछा जाएगा कि मकान कैसा हो, एलआईजी, एमआईजी या फिर एचआईजी। किचन कैसा हो? सुरक्षा के क्या इंतजाम हों। अन्य ऐसी सुविधाएं जो रोजमर्रा से जुड़ी हो? मसलन टाउनशिप में बाजार हो तो कौन कौन सी दुकानें वहां बनाई जाएं। आवासों का स्वरूप कैसा हो? मल्टी स्टोरी भवन या फिर डूपलेक्स? ऐसे तमाम ऑप्शन रखे जाएंगे।
तमाम विकल्प रखने की तैयारी
एमडीए अपनी वेबसाइट पर इस बाबत लिंक देगा। वहां क्लिक कर इस बाबत महिलाएं अपनी राय व्यक्त कर सकेंगी। इसके अलावा एमडीए अधिकारियों को पत्र के माध्यम से महिलाएं बता सकेंगी कि आवास कैसे होने चाहिए? अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। प्री प्रोस्पेक्टस छापने की भी तैयारी है।
आरक्षण की भी तैयारी
एमडीए अपने हिसाब से आरक्षण की तैयारी कर रहा है। हर योजना में महिलाओं को आवंटन पर आरक्षण दिया जाए। रजिस्ट्रेशन में ही रिजर्वेशन होगा तो आवंटन अपने आप आरक्षित हो जाएगा। इस पर मंथन चल रहा है कि कितने प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाए।