मेरठ। माघ शुक्ल प्रतिपदा का उदय होते ही साधना, सिद्धि और रहस्य का द्वार खुल जाता है। माघ गुप्त नवरात्रि वह काल है, जब साधक अंतर्मुखी होकर शक्ति आराधना में लीन होते हैं। यह नवरात्रि उत्सव और बाह्य आडंबर से दूर, तंत्र, मंत्र और यंत्र साधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि 19 से 27 जनवरी तक है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 19 जनवरी को कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त प्रातः 09:55 से 10:15 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक रहेगा।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजी के सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार, देवी भागवत में वर्ष में चार नवरात्रियों का उल्लेख है। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि प्रत्यक्ष कही जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ माह की नवरात्रियां गुप्त मानी जाती हैं। गुप्त नवरात्रि में नवदुर्गा के साथ-साथ दस महाविद्याओं काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की गुप्त रूप से आराधना की जाती है।
ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी बताते हैं कि गुप्त शब्द का अर्थ ही छिपा हुआ है। इसलिए इस नवरात्रि में की जाने वाली साधना को गोपनीय रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती, दुर्गा सहस्त्रनाम और दुर्गा चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी होता है। यह साधना संतान प्राप्ति, शत्रु बाधा निवारण और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक मानी जाती है। आचार्य मनीष स्वामी के अनुसार, गुप्त नवरात्रि और प्रत्यक्ष नवरात्रि के उद्देश्य भिन्न हैं। प्रत्यक्ष नवरात्रि जहां सांसारिक सुख, उल्लास और सामाजिक उत्सव का प्रतीक है, वहीं गुप्त नवरात्रि आत्मिक शुद्धि, सिद्धि और मोक्ष की साधना का काल है। शैव-शाक्त परंपरा में इसे विशेष महत्व प्राप्त है।