यह हैं खूबियां
यह हाई-स्पीड एरोडायनामिक ट्रेन सेट इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर स्व-चालित होंगे। रोलिंग स्टॉक की डिलीवरी 2022 में शुरू होगी। निर्माण की शर्तों में डिजाइन, निर्माण, आपूर्ति, परीक्षण और कमीशनिंग शामिल हैं। छह कोच वाले 30 ट्रेन सेट का उपयोग रीजनल ट्रांजिट सेवाओं के लिए होगा। तीन कोच वाले 10 ट्रेन सेट का उपयोग मेरठ में स्थानीय ट्रांजिट सेवाओं के लिए होगा। इन ट्रेनों में हवा के घर्षण और बाहर की आवाज को कम करने के लिए स्वचालित प्लग-इन प्रकार के दरवाजे होंगे।
ये ट्रेन अंत: संचालित होंगी यानी एक आरआरटीएस कॉरिडोर से दूसरे आरआरटीएस कॉरिडोर का सफर यात्री बिना ट्रेन बदले कर सकेंगे। इन ट्रेनों को आधुनिक ईटीसीएस लेवल-2 सिग्नलिंग सिस्टम के साथ समन्वित किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल भारत में पहली बार होगा। ईटीसीएस लेवल-2 सिग्नलिंग सिस्टम न केवल अंत: संचालन की सुविधा देगा, बल्कि कम समय अंतराल पर ट्रेन की आवाजाही भी सुनिश्चित करेगा, जिससे यात्रियों को ट्रेन के लिए ज्यादा प्रतीक्षा नहीं करनी होगी।
यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए, 3.2 मीटर चौड़ी आरआरटीएस ट्रेनों में शताब्दी एक्सप्रेस की तरह 2गुना2 ट्रांसवर्स बैठने की व्यवस्था होगी। यात्रियों के खड़े होने के लिए भी उचित व्यवस्था होगी। सामान रखने के लिए पर्याप्त जगह, सीसीटीवी कैमरे और अन्य आधुनिक सुविधाएं ट्रेन में उपलब्ध होंगी। इन वातानुकूलित ट्रेन में इकॉनमी और बिजनेस क्लास के कोच होंगे। प्रत्येक ट्रेन में एक बिजनेस क्लास कोच होगा और एक कोच महिलाओं के लिए आरक्षित होगा।