मदरसा शिक्षा परिषद में बतौर डिप्टी रजिस्ट्रार प्रतिनियुक्ति पर आए जावेद असलम को ज्वाइन कराने के मामले में मदरसा बोर्ड के चेयरमैन प्रो. जैनुस साजिदीन सवालों में घिर गए हैं। शासन ने इसे गलत बताते हुए कहा है कि यह भला कैसे हो गया। बिना अनुमति उन्हें कैसे ज्वाइन करा दिया गया।
यह है पूरा प्रकरण
कानपुर श्रमायुक्त कार्यालय में तैनात वित्त एवं लेखाधिकारी जावेद असलम पहले भी आठ साल प्रतिनियुक्ति पर अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग में काम कर चुके हैं। अनुभाग के डिप्टी रजिस्ट्रार पद पर प्रतिनियुक्ति के लिए शासन स्तर पर भर्तियों के आवेदन आमंत्रित किए गए। लेकिन ऐन उसी समय जावेद असलम अपना स्थानांतरण तथा प्रतिनियुक्ति लेटर लेकर यहां आ गए। उन्होंने इस बाबत मदरसा बोर्ड चेयरमैन प्रो. जैनुस साजिदीन से संपर्क किया और उन्होंने जावेद को ज्वाइन करा दिया।
अब खड़ा हुआ बखेड़ा
इस पर बखेड़ा खड़ा हो गया है। शासन ने कहा है कि बिना अनुमति के जावेद असलम को कैसे एकतरफा ज्वाइन करा दिया गया। इसके लिए पहले शासन से अनुमति लेनी चाहिए थी। सवाल यह भी है कि वे आठ साल पहले यहां रह चुकेहैं। ऐसे में दोबारा इसी विभाग में कैसे प्रतिनियुक्ति पा गए। शासन ने पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि उन्हें ज्वाइन नहीं कराया जा सकता है।
कोट :
इसमें मेरा रोल बस इतना है कि डिप्टी रजिस्ट्रार जावेद असलम शासन का आदेश लेकर आए और मैने ज्वाइन करा लिया। यदि अब शासन कह रहा है कि उनसे काम नहीं कराना है तो नहीं कराया जाएगा।
प्रो. जैनुस साजिदीन, चेयरमैन मदरसा बोर्ड
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यह राजनीति की जा रही है। मुझे शासन ने ही यहां प्रतिनियुक्ति पर भेजा और अब कहा जा रहा है कि वहां कैसे चले गए। यदि शासन का आदेश आया है तो मैं खुद ही रिलीव होकर चला जाऊंगा।
जावेद असलम