मेरठ। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 84 लाख रुपये का लोन लेकर प्रिंटिंग यूनिट स्थापित करने वाले एक व्यापारी पर बैंक की किश्तें न चुकाने और जमानत में रखी मशीनरी व स्टॉक बेचने का आरोप है। इस मामले में बैंक के रीजनल मैनेजर की तहरीर पर मेडिकल थाने में व्यापारी और दो गारंटरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
रीजनल मैनेजर मनोज कुमार के अनुसार, 5 अक्टूबर 2023 को सेंट्रल बैंक की जेल चुंगी शाखा से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना के तहत मैसर्स हर्षवर्धन एंटरप्राइजेज, गंगाधाम कॉलोनी को 84 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया था। इस फर्म के प्रोपराइटर इशान को यूनिट शुरू करने के लिए 67 लाख रुपये मशीनरी खरीदने तथा 17 लाख रुपये कच्चे माल के लिए दिए गए। इस ऋण के लिए अनुराधा छोकर और सुबोध छोकर ने गारंटर के रूप में गारंटी दी थी, जबकि आवासीय संपत्ति को भी जमानत में रखा गया।
बैंक के अनुसार, 12 अगस्त 2024 को पूरी धनराशि का भुगतान कर दिया गया और इसके बाद यूनिट चालू हो गई। हालांकि, लोन मिलने के बाद आरोपी ने बैंक की किश्तें जमा नहीं कीं। बैंक अधिकारियों द्वारा संपर्क किए जाने पर भी उसने बातचीत नहीं की। आरोप है कि बाद में आरोपी ने फैक्ट्री की मशीनरी और जमानत में रखे गए स्टॉक को भी बेच दिया। रीजनल मैनेजर ने आशंका जताई है कि आरोपी फरार होने की फिराक में है। एसएसपी के आदेश पर मेडिकल थाने में इशान, अनुराधा छोकर और सुबोध छोकर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने बताया कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।