मेरठ। पटाखे और पराली के धुएं के कारण गैस चैंबर में तब्दील हो रहे वायुमंडल क ी गैसें सेहत पर बुरा असर डाल रही हैं। ऐसे में छात्रों की सेहत को ध्यान में रखते हुए शहर के कई स्कूल रुटीन हेल्थ चेकअप में पीएफटी (पल्मोनरी फंग्शन टेस्ट) की शुरूआत करने जा रहे हैं। ताकि बढ़ते स्मॉग के बीच बच्चों के सांस लेने की क्षमता का पता चल सके।
शहर में सोफिया गर्ल्स स्कूल, दीवान पब्लिक स्कूल व कैंट के अन्य विद्यालयों में यह परीक्षण कराने का निर्णय लिया गया है। पीएफटी जांच से फेफड़े और सांस से जुड़ी बीमारियों का पता चलता है। पीएफटी स्पाइरोमीटर मशीन की मदद से होने वाली जांच है। इसमें मशीन से जुड़े माउथपीस को बच्चे या व्यक्ति के मुंह में रखकर सांस तेजी से खींचने व छोड़ने के लिए कहा जाता है। सांस लेने-छोड़ने की गति का ग्राफ कंप्यूटर में रिकार्ड होता है। यही ग्राफ फेफड़ों की मजबूती व सेहत को दिखाता है। इस टेस्ट से दमा, टीबी, ब्रांकाइटिस, संक्रमण जैसी बीमारियों की जानकारी मिलती है। स्मॉग के छोटे क ण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में जाकर उसके निचले हिस्से में जम जाते हैं। इससे तेजी से संक्रमण बढ़ता है और अंगों का विकास भी बाधित होता है।
वर्जन-
हर माह होगी जांच
स्मॉग का प्रभाव इतना ज्यादा है कि बच्चों में क्रॉनिक डिसीज के लक्षण बढ़ रहे हैं। इसलिए स्कूल में ही चेस्ट फिजीशियन को बुलाकर हर माह छात्राओं के फे फड़ों की जांच कराएंगे। अब प्रवेश फार्म के साथ लगने वाले हेल्थ रिपोर्ट में लंग टेस्ट रिपोर्ट को भी शामिल करेंगे। -सिस्टर गेल, प्रिंसिपल सोफिया गर्ल्स स्कूल
ताकि बच्चे स्वस्थ रहें
प्रदूषण के कारण बच्चों को खांसी जुकाम ज्यादा हो रहा है। बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए उनके हेल्थ कार्ड में अब पीएफटी को भी शामिल करेंगे। ताकि बच्चे पूरी तरह स्वस्थ रहें। पैरेंट्स टीचर मीटिंग में इस पर सहमति बनाएंगे। -एके दुबे प्रिंसिपल दीवान पब्लिक स्कूल कैंट
पैनल करेगा जांच
हर साल दिवाली के बाद वायुमंडल में हानिकारक गैसें एक चेंबर बना लेती हैं। इसका सीधा असर बच्चों पर होता है। स्कूल में चेस्ट फिजीशियन का पैनल बनाकर बच्चों के फेफड़ों की भी जांच कराएंगे। -चंद्रलेखा जैन प्रिंसिपल सेंट जोंस स्कूल कैंट