मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, शामली, सहारनपुर, बिजनौर समेत अन्य जिलों में चंद्रग्रहण का असर रहा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहे और बाजारों से ग्राहक नदारद रहे। शाम को चंद्रग्रहण पूर्ण होने के बाद ही बाजारों में रौनक लौटी।
मेरठ में आचार्य अंकित चौधरी ने बताया कि ग्रहण और प्रतिपदा (पड़वा) की उपस्थिति के चलते इस बार दहन और रंगों की होली के बीच एक दिन का अंतराल है। मंगलवार को चंद्रग्रहण सुबह 6 बजकर 23 मिनट से 6 बजकर 47 मिनट तक रहा। इसके बाद प्रतिपदा शुरू हो गई।
चंद्रग्रहण के कारण मंदिरों के कपाट रहे बंद
शामली जिले में चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल शुरू होते ही मंगलवार सुबह छह बजे से सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। इस दौरान मंदिरों में पूजा-अर्चना एवं दर्शन आदि धार्मिक कार्यक्रम बंद रहे। घरों पर ही लोगों ने भगवान का स्मरण किया।
भक्तों ने घरों में रहकर किया भगवान का स्मरण
मुजफ्फरनगर में चंद्रग्रहण के कारण श्रद्धालुओं में विशेष सतर्कता देखी गई। दोपहर तीन बजकर 20 मिनट पर ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले सूतक काल लगने के कारण मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। इस दौरान भक्तों ने घरों में रहकर भगवान का स्मरण किया।
मंदिरों में गंगाजल छिड़ककर किया पूजन
बागपत जिले में सुबह चंद्रग्रहण के कारण सूतक काल शुरू होते ही मंदिरों के कपाट बंद हो गए। मंदिरों में चंद्र ग्रहण के कारण पूजन नहीं किया गया। घरों में सुबह छह बजे से पहले ही लोगों ने उठकर पूजन किया और फिर कपाट बंद कर दिए। चंद्र ग्रहण के समाप्त होने के बाद मंदिरों में गंगाजल छिड़ककर पूजन किया।
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