लखनऊ के डिजिटल कंट्रोल रूम में अब 20 अक्टूबर को घंटी बजेगी। तकनीकी और सर्वर की कुछ खामियां के चलते इस व्यवस्था में देरी हुई है। हालांकि मेरठ में संवेदनशील इलाके और प्रमुख चौराहों का मेप बनाकर डिजिटल कंट्रोल रूम को भेजा। इस सिस्टम में जुड़ने के लिए मेरठ को 34 इनोवा, 21 बुलेरो व 43 फैंटम मिलेगी।
घटना या आपातकाल स्थिति में कंट्रोल रूम का फोन रिसीव न होना या फिर फरियादी के साथ अभद्रता की शिकायतों को देखते प्रदेश सरकार ने लखनऊ में डिजिटल कंट्रोल रूम बनाया। जिसमें यूपी के सारे जिले की पुलिस को जोड़ा जाएगा। 100 नंबर डायल करने पर घंटी जनपद के कंट्रोल रूम में नहीं, बल्कि लखनऊ के डिजिटल कंट्रोल रूम में बजेंगी। जहां से तत्काल पुलिस को घटनास्थल पर भेजा जाएगा।
इसके लिए मेरठ को 34 इनोवा, 21 बुलेरो व 43 फैंटम मिलेगी। इसके लिए 204 पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें रेडियो विभाग और फायर बिग्रेड भी शामिल होंगे। इस सिस्टम में थाना पुलिस से पहले कंट्रोल रूम से जुड़ी पुलिस मौके पर पहुंच जाएगी। यह व्यवस्था दो अक्टूबर को शुरूआत में मेरठ समेत दस जिले में शुरू होनी थी। लेकिन अब 20 अक्टूबर को यह व्यवस्था लागू होगी।
रात में हाईवे पर सुविधा
एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने बताया कि कंट्रोल रूम से जुड़ी गाड़ियों और पुलिसकर्मी दिन में शहर के प्रमुख चौराहों पर तैनात रहेगे। जबकि रात में यह सभी गाड़ियां हाईवे पर अलर्ट रहेगी। ताकि हाईवे से गुजरने वाले लोग खुद को सुरक्षित महसूस करें।
मेप तैयार कर लखनऊ भेजा
हर वारदात में नोडल अधिकारी ही तय करेगा कि कितनी फोर्स भेजनी है। लूट, हत्या, एक्सीडेंट, ट्रैफिक को लेकर हंगामा या किसी बवाल में फोर्स जानी है, इसको घटना के अनुसार भेजना होगा। जबकि प्रमुख त्यौहार, प्रमुख या संवेदनशील इलाके में फोर्स की व्यवस्था भी सिस्टम के जरिये होगी। फिलहाल इस व्यवस्था को एसपी ट्रैफिक, एएसपी और सीओ कोतवाली देखेंगे।