पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा की सूची पर गठबंधन की भी नजर लगी है। जैसे ही भाजपा की सूची जारी होगी, वैसे ही गठबंधन भी जातिगत और स्थानीय समीकरण को देखते हुए अपने प्रत्याशी बदल सकता है। इसके अलावा भाजपा में भी भगदड़ मचने की संभावना जताई जा रही है, जिसका लाभ भी गठबंधन उठाएगा।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार पार्टी नेतृत्व इसी बगावत और भितरघात को लेकर भी पूरी तरह सतर्क है। इसी कारण से कुछ सीटों पर अंतिम समय में भी प्रत्याशी की घोषणा हो सकती है। क्योंकि भाजपा ऐसे किसी नेता को मौका नहीं देना चाहती है, जो टिकट कटने पर भाजपा से बगावत कर उसके लिए मुसीबत खड़ी करे।
गौरतलब है कि पश्चिम की सीटों पर भाजपा प्रभारियों द्वारा लिए सांसदों के फीडबैक के बाद भाजपा नए चेहरों का एलान कर सकती है। यानी सांसदों के रिपोर्ट कार्ड ने भाजपा का मूड पूरी तरह बदल दिया है।
हालांकि पार्टी इस चुनाव में तमाम महत्वपूर्ण सीटों पर बदलाव के साथ एक नएपन का संदेश देना चाहती है। वहीं भाजपा पश्चिमी यूपी 2014 में हुए लोकसभा चुनाव की रणनीति को दोहराना चाहती है। ऐसे में बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहेगी। यही कारण है कि पार्टी हर विकल्प पर गहन मंथन कर रही है।
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