हालांकि यह बात दीगर रही कि इस पूरे भाषण में न तो एक बार भी राम मंदिर कर जिक्र आया। न लव जेहाद और न ही गोरक्षा जैसे मुद्दों का। नोटबंदी और जीएसटी जैसे मामलों को तो मोदी न किसी और रैली में छू रहे हैं न इसमें छुआ। हालांकि उनकी टीम चाहे वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों या फिर प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्रनाथ पांडे, सभी ने हिंदुत्व पर फोकस किया। गुंडागर्दी के बहाने, बूचड़खानों को बंद करने की बात कहकर यह साफ किया कि पार्टी अपने पुराने एजेंडे को भी आसानी से छोड़ने वाली नहीं है।
दरअसल, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, बागपत, कैराना या अन्य सीटों पर भाजपा पिछले चुनाव में ध्रुवीकरण कार्ड खेल गई थी। निशाना इस बार भी यही है, पर इस बार पार्टी अपने पांच साल के कार्यों को लेकर भी बात करना चाह रही है। उधर, चूंकि सपा-बसपा का गठबंधन दलित-मुस्लिम वोटों में तगड़ी सेंधमारी कर रही है, तो यह गणित भाजपा के लिए बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
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