वहीं बसपा की बात करें तो सहारनपुर बसपा के खाते में आई है। इस सीट पर बसपा का शुरू से ही दावा रहा है। बिजनौर पर बसपा ने लगातार अपना दावा मजबूत किया है। यहां पहले रुचि वीरा को बसपा में लाया गया। उसके बाद उन्हें बाहर का रास्ता दिखाकर इकबाल ठेकेदार को फिर से लोकसभा प्रभारी बनाया गया। माना जा रहा है कि वही चुनाव लड़ेंगे। इससे सटी नगीना सुरक्षित सीट है। इस सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा के डॉ. यशवंत सिंह जीते थे और उससे पहले चुनाव में इस सीट पर सपा के यशवीर धोबी ने विजय पताका फहाराई थी। इस बार बसपा का प्रत्याशी यहां से चुनाव लड़ेगा।
माना जा रहा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती खुद ही यहां से चुनाव लड़ सकती हैं। अमरोहा भी बसपा के खाते में गई है। मेरठ में हाजी याकूब कुरैशी को लोकसभा प्रभारी बनाया गया है और तय माना जा रहा है कि वही बसपा से चुनाव लड़ेंगे। बुलंदशहर सीट सुरक्षित है और यहां बसपा लड़ेगी। यहां से पूर्व विधायक योगेश वर्मा का टिकट तय माना जा रहा है। अलीगढ़ और आगरा ये दोनों सीटें भी बसपा के हिस्से में हैं।
कैराना अहम सीट
कैराना पश्चिमी यूपी की अहम सीट है। इस सीट पर उपचुनाव में रालोद प्रत्याशी तब्बसुम जीतीं थीं। हालांकि इस सीट पर सपा का दावा पहले से ही रहा है और अपनी प्रत्याशी को ही एक तरह से सपा ने रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ाया था। इस सीट पर इस बार सपा का ही दावा था और यह सीट सपा छोड़ने को तैयार नहीं थी। मुरादाबाद, रामपुर और संभल में सपा अपना गणित बेहतर मान रही है। हालांकि गाजियाबाद की सीट का सपा के हिस्से में जाना चौंकाने वाला है। यहां की राह सपा के लिए पहले भी मुश्किल रही है और गठबंधन के बावजूद भी आसान नहीं होगी। हाथरस सुरक्षित सीट है और इस पर सपा लडे़गी।
रालोद का नाम न लेना रहस्यमय
गठबंधन हुआ, सीटों का बंटवारा भी हुआ और सीटें खाली भी छोड़ी गईं। लेकिन रालोद का नाम न लेना रहस्यमय बना हुआ है। यह तो तय है कि रालोद गठबंधन का हिस्सा है लेकिन यह रणनीति है या कुछ और, यह चर्चा का विषय है। हालांकि रालोद थिंक टैंक सोच रहा है कि अभी अखिलेश यादव को मनाकर हाथरस की सीट और अपने हिस्से में ले ली जाएगी और बुलंदशहर पर भी बात होगी, पर इसकी उम्मीद कम ही है।
रालोद का समीकरण
जो सीटें छोड़ी गई हैं, उनमें कहा जा रहा है कि बागपत से जयंत चौधरी चुनाव लड़ेंगे तो मुजफ्फरनगर से खुद चौधरी अजित सिंह मैदान में उतरेंगे। मथुरा से कई दावेदार रालोद के पास हैं। डॉ. अनिल चौधरी, कुंवर नरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिकरवार आदि का दावा है, तो साथ ही एचपीएस परिहार का दावा भी यहां से है। इसके अलावा अन्य पूर्व विधायक समेत कई लोग कतार में हैं।
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