फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव 2019: कैराना सीट पर होगी कांटे की टक्कर, यहां हर बार नया सांसद चुनते हैं मतदाता

Tue, 12 Mar 2019 12:44 PM IST
Dimple Sirohi रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव 2019 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

कैराना लोकसभा सीट इस बार फिर से काफी अहम होने जा रही है। सपा बसपा और रालोद के गठबंधन में इस बार ये सीट सपा के कोटे में आई है। कांग्रेस अपने दम पर चुनाव लड़ने का दम भर रही है, लिहाजा मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं। लेकिन इस सीट के पिछले तीन चुनावों का इतिहास बताता है कि यहां के मतदाताओं ने हर बार नई पार्टी और नया सांसद चुना है। 

विज्ञापन


कैराना लोकसभा सीट पर मुख्यत: पूर्व सांसद हुकुम सिंह और हसन परिवार के बीच ही चुनावी मुकाबला होता रहा है। साल 2009 में हुए चुनाव में बसपा प्रत्याशी के तौर पर उतरीं तबस्सुम बेगम और बाबू हुकुम सिंह में सीधी टक्कर हुई। सपा से शाजान मसूद चुनाव लड़े। उन्हें 1.24 लाख वोट भी मिली। 

मुस्लिम मतों के बंटवारे के बावजूद बसपा के परंपरागत अनुसूचित जाति के मतों ने तबस्सुम हसन की नैया पार लगा दी। साल 2014 के चुनाव में बाजी एकदम उलट गई। इन चुनावों में मुजफ्फरनगर दंगों का असर दिखा। गैर मुस्लिम मतों का भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण हो गया, जबकि मुस्लिम मत सपा के नाहिद हसन और बसपा के कंवर हसन में बंट गए। 

इस चुनाव में खास बात रही कि बसपा का परंपरागत अधिकांश वोटर भी भाजपा के पाले में पहुंच गया। इसी के चलते भाजपा के हुकुम सिंह ने 2.36 लाख मतों के भारी अंतर से हराया। रालोद प्रत्याशी करतार भड़ाना तो 42 हजार मतों पर ही सिमट गए। मगर सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर मई 2018 में हुए उपचुनाव में भाजपा को ये सीट गवानी पड़ी। 

इन चुनावों में सपा रालोद के बीच हुए समझौते के आधार पर सपा से जुड़ीं तबस्सुम बेगम को रालोद के सिंबल से चुनाव लड़वाया गया। बसपा ने भी समर्थन में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा। तबस्सुम और भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह में कांटे का मुकाबला हुआ। लेकिन जाट मतों का रालोद के पक्ष में अधिक झुकाव होने से भाजपा को ये सीट गवांनी पड़ी। 

हालांकि भाजपा ने इसे प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर चुनाव लड़ा था मुख्यमंत्री से लेकर पार्टी के कई मंत्री और दिग्गज नेता तक यहां प्रचार में उतारे गए। लेकिन जाटों की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ गई।

लोकसभा उपचुनाव  2018
तबस्सुम हसन    रालोद    4,81,182
मृगांका सिंह    भाजपा    4,36,564
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव 2014
हुकुम सिंह    भाजपा    5,65,909
नाहिद हसन    सपा    3,29,081
कंवर हसन    बसपा    1,60,414
करतार भड़ाना    रालोद    42,706

लोकसभा चुनाव  2009
तबस्सुम हसन    बसपा    2,83,259
हुकुम सिंह    भाजपा          2,60,796
शाजान मसूद    सपा    1,24,802
सुरेंद्र सिंह    कांग्रेस    37,795
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें