पिछले चुनाव में की थी नैया पार
लोकसभा चुनाव 2014 में मेरठ समेत आसपास की सभी दस सीटों पर अति पिछड़े वर्ग के अधिकतम वोट भाजपा के पक्ष में गए थे। मोदी ने इस वर्ग को खास आकर्षित किया था। सपा और बसपा तमाम प्रयास के बाद भी इस वर्ग का वोट लेेने में नाकाम ही रहीं। इस बार भी भाजपा ने इस वोट को साधने की पूरी तैयारी कर रखी है। भाजपा के थिंक टैंक का मानना है कि ये वर्ग खुद को मोदी से जुड़ा मानता है और भाजपा को फिर से विजयी रथ पर सवार कर सकता है।
गठबंधन लगा सकता है सेंध
इस वोटर वर्ग में सेंध लगाने के लिए सपा बसपा गठबंधन ने भी इस बार पूरी कमर कसी है। दरअसल इस वर्ग का वोटर सपा का किसी समय में मजबूत आधार रहा है, पर पिछले चुनाव में छिटक गया। इस बार गठबंधन की पूरी तैयारी इनको अपने पाले में खींचने की है।
यूपी की जिन 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की कैटेगरी में डालने पर बार-बार विचार हुआ उनमें से सात का मेरठ तथा आसपास की सभी सीटों पर तगड़ा प्रभाव है।
उत्तर प्रदेश की 17 अति पिछड़ी जातियां
निषाद, बिन्द, मल्लाह, केवट, कश्यप, भर, धीवर, बाथम, मछुआरा, प्रजापति, राजभर, कहार, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा और गौड़ हैं जिनमें से कश्यप, प्रजापति, कुम्हार, धीमर के अलावा सैनी, माली, धोबी आदि का इन सभी सीटों पर खासी दखल है।
इन्हें साधने को सभी ने कसी कमर
भाजपा: भाजपा ने धर्मवीर सैनी को लोकसभा चुनाव में प्रभारी मंत्री बनाया है। सूर्यप्रकाश पाल लोकसभा प्रभारी बनाए हैं। कृष्णपाल कश्यप, विजेंद्र कश्यप आदि को लगाया है। हरपाल सैनी भी जुटे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति को भी लगाया है।
बसपा : बसपा ने पूर्व एमएलसी सुरेश कश्यप आदि को जिम्मेदारी दे रखी है। दारा सिंह प्रजापति, दयाराम सेन पूर्व मंत्री, ओमप्रकाश कश्यप, महेंद्र कश्यप, अनुज राजवंशी, पवन कश्यप, धर्मवीर आदि की लंबी लिस्ट तैयार है।
सपा: सपा ने राज्यसभा सांसद बिशंभर प्रसाद निषाद, एमएलसी राजपाल कश्यप, रमेश प्रजापति, राम आसरे विश्वकर्मा सभी को जिम्मेदारी दी है। प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल कुर्मी वर्ग से हैं।
पूरे उप्र में 51 प्रतिशत हैं ओबीसी
सन 2009 में बीपीएल सर्वे, 2002 के आंकड़े जारी किए गए। इस सर्वे के अनुसार, उप्र में 51.78 प्रतिशत जनसंख्या ओबीसी है। हालांकि पश्चिमी उप्र में अति पिछड़ों की संख्या 13 से बीस प्रतिशत बताई जाती है। इस सर्वे के अनुसार राज्यों में तमिलनाडु ओबीसी जनसंख्या के लिहाज से नंबर एक है, जहां कुल ग्रामीण जनसंख्या के 54.37 प्रतिशत ओबीसी हैं। बिहार और छत्तीसगढ़ में ओबीसी जनसंख्या क्रमश: 50.37 प्रतिशत और 37 प्रतिशत हैं।
यह कहता है सैंपल सर्वे
वर्ष 2007 में नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) ने देश की जनसंख्या में ओबीसी का प्रतिशत 41 बताया। उत्तरप्रदेश में 54.64 प्रतिशत ग्रामीण आबादी ओबीसी बताई गई है, जबकि शहरों में कुल आबादी में ओबीसी का प्रतिशत 50 से कम है।
सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर भाजपा
जपा पश्चिम की किसी भी जाति को नाराज नहीं करना चाहती है। यही कारण है कि बड़ी संख्या वाली जातियों को लोकसभा में टिकट दिया है। कम संख्या वाली अति पिछड़ी जातियों के नेताओं को चुनाव से पहले आयोग में पद देकर खुश करने की कोशिश की गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा ने प्रत्येक सीट पर चार से छह लाख की संख्या रखने वाली अतिपिछड़ी जातियों पर पूरा फोकस रखा है।
इसके अलावा अति पिछड़ों और अन्य वर्गों को साधने के लिए सहारनपुर, गौतमबुद्ध नगर और अलीगढ़ से ब्राह्मण, गाजियाबाद और मुरादाबाद से राजपूत, मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर, फतेहपुर सीकरी से जाट प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। भाजपा ने सबसे बड़ा दांव सैनी, कश्यप, पाल जाति को लेकर चला है।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने कुछ अति पिछड़ी जातियों को आयोग में पद देकर भी साधने का काम किया है। मेरठ के लोकेश प्रजापति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का उपाध्यक्ष, सहारनपुर के जसवंत सैनी को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का उपाध्यक्ष, शामली के रामजीलाल कश्यप को आयोग में सदस्य बनाया, मुजफ्फरनगर के जगदीश पांचाल को पिछड़ा वर्ग आयोग में जगह दी गई। -मुजफ्फरनगर (रणवीर सैनी)
अति पिछड़े वोटों की स्थिति
| लोकसभा सीट |
मतदाताओं की संख्या |
मौजूदा स्थिति |
| सहारनपुर |
17,22,000 मतदाता |
300000 से अधिक |
| मेरठ |
17,22,000 मतदाता |
400000 से अधिक |
| बागपत |
15,92,000 मतदाता |
250000 से अधिक |
| मुजफ्फरनगर |
16,85,000 मतदाता |
400000 से अधिक |
| बिजनौर |
16,51,000 मतदाता |
350000 से अधिक |
| नगीना |
15,74,000 मतदाता |
300000 से अधिक |
| कैराना |
16,48,414 मतदाता |
300000 से अधिक |