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मिशन 2019: भाजपा-सपा के बीच मुकाबले में फंसा कांग्रेस का पेंच, पढ़िए कैराना की ग्राउंड रिपोर्ट

Wed, 10 Apr 2019 03:11 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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लोकसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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कैराना लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रदीप चौधरी, सपा की तबस्सुम बेगम और कांग्रेस के हरेंद्र मलिक के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। हर प्रत्याशी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहा है। शामली और सहारनपुर जिलों में लगने वाली लोकसभा की पांच विधान सभाओं के कुल 16.48 लाख वोटर हैं। इनमें सबसे ज्यादा 5.50 लाख मुस्लिम हैं, जिन पर सपा प्रत्याशी तबस्सुम हसन का दावा मजबूत बन रहा है, भाजपा गैर मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में कराने में लगी है, लेकिन सपा-बसपा और रालोद गठबंधन के कारण इस बार 2014 की तुलना में समीकरण बदले हुए हैं। हरेंद्र मलिक व्यक्तिगत प्रभाव से जाट और मुस्लिम मतों में भी सेंध लगाते नजर आ रहे हैं। यही मुकाबले का फंसा पेंच है। मतदाता फिलहाल चुप्पी साधे हैं लेकिन कैराना का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां  का मतदाता एन वक्त पर चुनावी माहौल देखकर मतदान करता है। 

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गैर मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश में भाजपा
भाजपा प्रत्याशी प्रदीप चौधरी की सबसे बड़ी ताकत मोदी फैक्टर है। वे खुद कहते हैं कि इस चुनाव में जनता मोदी के नाम और काम दोनों पर वोट करेगी और हमें जिताएगी। सर्वसमाज का वोट मिलेगा। मोदी और सीएम की रैली के बाद मृगांाका का टिकट कटने से कैराना के गुर्जरों की नाराजगी भी दूर होने के दावे किए जा रहे हैं। यहां भाजपा की चुनौती जाट वोट ही है। कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र मलिक जाट है, दूसरे सपा-बसपा और रालोद गठबंधन के कारण रालोद समर्थक जाट मतदाताओं का गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में चले जाने की भी चिंता है। इस बार एससी वोटों का छिटकना भी भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

मुस्लिम फैक्टर और गठबंधन का समीकरण बड़ी ताकत 
सपा प्रत्याशी तबस्सुम हसन की सबसे बड़ी ताकत लोकसभा सीट के 5.50 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। मुन्नवर हसन परिवार का इन पर काफी प्रभाव रहा है। गठबंधन के कारण करीब बसपा का करीब 2.10 लाख एससी  वोटर और रालोद की वजह से जाट मतों के आधार पर वे अपने समीकरण मजबूत होने का दावा कर रही हैं। उनकी चुनौती कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र मलिक है जो मुस्लिम मतों में सेंधमारी करने की कोशिश कर रहे हैं।

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क्षेत्र में व्यक्तिगत प्रभाव हरेंद्र की ताकत
कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र मलिक की सबसे बड़ी ताकत उनका राजनीतिक अनुभव है। खतौली, बघरा से विधायक रहने के अलावा कई चुनाव लड़ने का अनुभव रखते हैं। क्षेत्र में लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण बने व्यक्तिगत संपर्क भी उनकी ताकत है। मुस्लिम और जाट मतदाताओं में वह सेंध लगा रहे हैं। हरेंद्र मलिक कहते हैं कि सर्वसमाज का वोट उन्हें मिलेगा। हालांकि लोकसभा सीट पर तीन दशकों से कांग्रेस की खराब स्थिति हरेंद्र की सबसे बड़ी कमजोरी है।

कुल मतदाता 1648000
कैराना में आने वाली विधानसभा: कैराना, शामली, थानाभवन, गंगोह, नकुड़

लोकसभा उपचुनाव 2018
तबस्सुम हसन ( रालोद)     4.81182
मृगांका सिंह   (भाजपा )    4,36,564

लोकसभा चुनाव 2014
हुकुम सिंह भाजपा           5,65,909
नाहिद हसन सपा            3,29,081
कंवर हसन बसपा            160414
करतार भड़ाना रालोद          42706

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