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लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस न बिगाड़ दे गठबंधन का गणित, कैराना सीट पर इन्होंने ठोंकी मजबूत दावेदारी

Tue, 05 Mar 2019 11:22 AM IST
Dimple Sirohi रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली
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कांग्रेस पार्टी
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लोकसभा चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प होने वाला है। हर पार्टी ने अपनी तैयारियों शुरू कर दी हैं। इधर कैराना सीट पर कांग्रेस से टिकट के लिए पूर्व विधायक रहे राव अब्दुल वारिस ने भी दावेदारी ठोंक दी है। उनकी पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात भी हो चुकी है। 
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सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के बाद कैराना लोकसभा सीट सपा के हिस्से में आई है। सपा से मौजूदा सांसद तबस्सुम बेगम या उनके बेटे नाहिद हसन प्रत्याशी हो सकते हैं। ऐसे राव अब्दुल वारिस कांग्रेस प्रत्याशी बने तो गठबंधन का गणित बिगड़ सकता है। 

राव अब्दुल वारिस थाना भवन से 2007 के विधान सभा चुनाव में बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। फिलहाल वह कांग्रेस में है। कैराना सीट पर दावेदारी की बात उन्होंने स्वीकार की है। उनका कहना था कि कुछ दिन पहले पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें बुलाकर बात भी की थी। पार्टी यदि जिम्मेदारी देती है तो वह मजबूती से चुनाव लड़ेंगे।

कांग्रेस इस सीट को गंभीरता से ले रही है। पिछले दिनों पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी, वेस्ट  यूपी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर पुलवाला में शहीद हुए प्रदीप और अमित के घर भी संवेदना जताने पहुंचे थे।

शामली आते समय उन्होंने एक ढाबे पर रुककर जलपान किया था। इस दौरान उन्होंने बातचीत कर लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश की थी। सपा-बसपा और रालोद के बीच गठबंधन हो चुका है। भाजपा से पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह के ही चुनाव लड़ने की संभावना है। 

कैराना लोकसभा सीट पर 2014 के आम चुनाव में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में  उतारे थे। सपा ने नाहिद हसन, बसपा ने कंवर हसन और रालोद ने करतार सिंह भड़ाना को चुनाव लड़ाया। हुकुम सिंह ने 5.65 लाख वोट लेकर सपा के नाहिद हसन को मात दी थी।

नाहिद को 3.29 लाख मत मिले थे, इस चुनाव में मुजफ्फरनगर दंगों का साफ नजर दिखा और वोटों का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हुआ। लेकिन सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई। इस सीट पर मई 2018 में हुए उपचुनाव में पासा पलट गया। सपा-रालोद के बीच हुए समझौते के बाद पूर्व सांसद तबस्सुम हसन को चौधरी अजित सिंह ने रालोद में शामिल करके कैराना का टिकट दिया।

सपा, बसपा और कांग्रेस ने भी अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारे। विपक्षी पार्टियों की एकजुटता का नतीजा हुआ कि रालोद की तबस्सुम हसन ने भाजपा की मृगांका सिंह को हराकर भाजपा से ये सीट छीन ली। 

भाजपा की तर्ज पर रालोद का बूथ को मजबूत करने पर जोर   
लोकसभा चुनाव 2019 के नजदीक आते ही सपा-बसपा गठबंधन में शामिल रालोद ने भी भाजपा की तर्ज पर बूथ को मजबूत करना शुरू कर दिया है। सोमवार को प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान ने विधानसभावार बूथों की समीक्षा की।

कैराना लोकसभा उपचुनाव जीतकर चर्चा में आए रालोद ने सपा-बसपा गठबंधन में शामिल होकर सियासी तौर पर स्थिति को मजबूत किया है। संगठन ने गठबंधन के तहत मिल रही संभावित सीटों को जीतने के लिए कवायद तेज कर दी है।
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इन सीटों पर जहां पार्टी का सीधा मुकाबला भाजपा से माना जा रहा है, वहीं पार्टी ने भाजपा की तर्ज पर ही अपने बूथों को मजबूत करने की रणनीति तैयार की है। सोमवार को बाउंड्री रोड स्थित पार्टी के कैंप कार्यालय पर प्रदेश संगठन प्रभारी ने संगठन और बूथ की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जीत सुनिश्चित करने के लिए बूथों को मजबूत करना होगा। उन्होंने पदाधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी भी सौंपी। बैठक में पार्टी सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी के 12, 14 और 17 मार्च को होने वाले कार्यक्रमों को सफल बनाने के निर्देश दिए। 

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