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मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर भाजपा की हैट्रिक में आड़े आई कांग्रेस, दिलचस्प होगा मुकाबला

Tue, 19 Mar 2019 04:33 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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भाजपा-कांग्रेस
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लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस का निशाना इस दंगल में केवल भाजपा है। कांग्रेस भाजपा को हराने के लिए कोई भी पैंतरा आजमाने के लिए तैयार है। भले ही इसके लिए पार्टी को कोई रिस्क क्यों न लेना पड़े। यही कारण है कि मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर आखिरी वक्त पर प्रत्याशी बदल दिया गया। भाजपा के लिए अब बड़ी चुनौती यह है कि क्या इस सीट पर भाजपा हैट्रिक बना पाएगी या नहीं।
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आगामी चुनाव के लिए मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर ऐसी तस्वीर बनाई गई है कि अब भाजपा और कांग्रेस के बीच इस सीट पर मुकाबला कड़ा होता नजर आ रहा है। कांग्रेस ने पहले इस सीट पर ब्राहम्ण कार्ड खेला, इसके अगले ही दिन पार्टी के दिग्गजों ने अपना फैसला बदलते हुए नए प्रत्याशी की घोषणा कर दी। अब इस सीट पर हरेंद्र अग्रवाल कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ेंगे। 

इस सीट पर पिछले दो चुनावों से भाजपा ने कब्जा जमाया हुआ है। कहा जा रहा है कि भाजपा इस बार भी राजेंद्र अग्रवाल को मैदान में उतारने वाली है, जो वैश्य समाज से आते हैं। वहीं कांग्रेस ने भी वैश्य कार्ड खेल दिया है। ऐसे में इस सीट पर भाजपा के सामने हैट्रिक बनाने की कड़ी चुनौती रहेगी। 

मेरठ हापुड़ सीट पर 25 लाख 18 हजार से भी ज्यादा मतदाता 11 अप्रैल को मतदान करेंगे जिसके बाद यह तय हो जाएगा कि भाजपा इस सीट पर हैट्रिक बना पाती है या फिर भाजपा का सफर यहीं खत्म हो जाएगा। 

इतिहास पर नजर डालें तो इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। अब तक पांच बार भाजपा ने यहां से जीत हासिल की है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार राजेंद्र अग्रवाल को 5,32,981 वोट हासिल कर विजयी हुए थे।
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कांग्रेस न पिछले चुनाव में अभिनेत्री नगमा को इस सीट पर टिकट दिया था। नगमा ने 42,911 वोट प्राप्त कर चौथा स्थान हासिल किया था। नगमा लोकसभा चुनाव 2019 में इस सीट से चुनाव लड़ने से पहले ही इंकार कर चुकी थीं जिसके बाद कांग्रेस ने वरिष्ठ अधिवक्ता ओपी शर्मा को टिकट दिया लेकिन 48 घंटे बाद ही टिकट वापस ले लिया।

जाहिर है सीनियर अधिवक्ता ओपी शर्मा का टिकट जाने के बाद यह साफ हो चुका है कि कांग्रेस गठबंधन नहीं बल्कि भाजपा को टारगेट बना रही है। हालांकि टिकट वापस लिए जाने से ब्राहम्ण मतदाताओं का नुकसान कांग्रेस को होगा और इसका लाभ गठबंधन उठा सकता है, लेकिन पार्टी वैश्य मतों के महत्व को देखते हुए यह त्याग करने को तैयार है। यह साफ है कि मुकाबला कड़ा होगा और यदि राजेंद्र अग्रवाल इस सीट पर प्रत्याशी होते हैं तो भाजपा किसी भी रूप में ये सीट अपने हाथ से नहीं जाने देना चाहेगी।
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