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लोकसभा चुनाव 2019: कांग्रेस पर नहीं आया गठबंधन का मन, बिगड़ सकते हैं समीकरण 

Wed, 13 Mar 2019 11:45 AM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • कांग्रेस को 15 सीट देने की चल रही थी चर्चाएं, बसपा सुप्रीमो मायावती के मना करने पर गठबंधन समेत कांग्रेस कार्यकर्ता भी हैरान
  • भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस के गठबंधन में शामिल होने के लगाए जा रहे थे कयास
  • अब कांग्रेस को अपने पुराने वोट बैंक से है आस, भाजपा को भी फायदा मिलने की उम्मीद
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सपा, बसपा, कांग्रेस
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विस्तार
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भाजपा के विजयी रथ को रोकने के लिए विपक्ष द्वारा बनाए जा रहे समीकरण बिगड़ सकते हैं। सपा-बसपा-रालोद गठबंधन में कांग्रेस की एंट्री की उम्मीद बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान से धूमिल हो गई है। इससे न केवल गठबंधन कार्यकर्ता हैरान हैं बल्कि कांग्रेसियों को भी झटका लगा है। सियासी पंडितों का मानना है कि कांग्रेस के गठबंधन से अलग रहकर लड़ने का फायदा भाजपा को मिलने की संभावना ज्यादा है। हालांकि कांग्रेस को उसका पुराना वोट हर चुनाव में मिलता रहा है जो इस चुनाव में भी उसके पास ही रहने वाला है। 

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गठबंधन कर बांट ली सीटें
लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को चुनौती देने के लिए धुर विरोधी सपा और बसपा ने सारे गिले-शिकवे भुलाकर गठबंधन बनाकर सीटें बांट ली हैं। इस गठबंधन में पश्चिमी यूपी में प्रभाव रखने वाले रालोद को भी शामिल किया गया है।

भाजपा को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चल रही महागठबंधन की कवायद के तहत भाजपा विरोधी वोटों के बिखराव को रोकने के लिए प्रदेश में बने इस गठबंधन में कांग्रेस के भी शामिल होने की चर्चा चल रही थी। हालांकि गठबंधन ने कांग्रेस के लिए पहले ही दिन दो सीटें रायबरेली और अमेठी छोड़ने का एलान कर दिया था। लेकिन कार्यकर्ताओं की एक होकर लड़ने की मांग पर कांग्रेस को 15 सीटें देने की बात की जा रही थी।

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हर नेता को फैसला लेने का अधिकार
कांग्रेस की तरफ से 20 सीटों की मांग करना बताया जा रहा था। इसी चर्चा के बीच राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा का लखनऊ दौरा भी टाल दिया गया था। लेकिन इस सबके बीच मंगलवार को राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने देश में कहीं भी कांग्रेस के साथ जाने से मना कर दिया।

इस मुद्दे पर पार्टी के प्रदेश संगठन प्रभारी वीरेंद्र मदान ने अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि उनकी पार्टी ने शुरू से ही अपना रुख साफ करते हुए अकेले दम सभी 80 सीटों पर लड़ने का एलान कर दिया था। इसमें कुछ साथ आए छोटे दलों के लिए सीटें छोड़ी जा सकती हैं। जहां तक मायावती के बयान की बात हैं तो हर नेता को अपने फैसले लेने का अधिकार है। अगले दो-तीन दिन के अंदर कांग्रेस अपने प्रत्याशी घोषित करना शुरू कर देगी। 
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वोट तो बनी, पर नहीं बंटे पहचान पत्र 
  • मतदाता सूची में दर्ज हो चुके हैं न, मतदाताओं के नाम।
  • मतदाता पहचान पत्र को काट रहे हैं चक्कर।
  • जनपद में एक लाख से ज्यादा नये मतदाता इस बार हुए हैं शामिल।
मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के तहत जनपद में करीब एक लाख नये मतदाता बने हैं। लेकिन मतदाता पहचान पत्र किसी का नहीं आया है। मतदाता पहचान पत्र के इंतजार में युवा मतदाता तहसीलों और बीएलओ के पास चक्कर लगा रहे हैं। 

लोकसभा चुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने सिंतबर और अक्तूबर माह में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान शुरू कराया था। जिसमें प्रत्येक विधानसभा में बीएलओ ने घर-घर जाकर पहले मतदाताओं का सत्यापन किया था। जिसमें मतदाता बनने की अर्हता पूर्ण करने वाले या पहले से छूटे लोगों को नए मतदाता बनाने के फार्म भरवाए गए। जबकि जिनके नाम गलत थे, या फर्जी रूप से मतदाता सूची में दर्ज थे। 

उनके नाम सूची से हटाए गए। एक जनवरी को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाश हुआ तो उसमें एक लाख से ज्यादा मतदाता इस बार नए बने हैं। लेकिन दो माह बीतने के बाद भी इन मतदाताओं को पहचान पत्र नहीं मिले हैं। इस बारे में एडीएम प्रशासन और उपजिला निर्वाचन अधिकारी रामचंद्र ने बताया कि मतदाता पहचान पत्र प्रिंटिंग में हैं। दो-तीन दिन में आ जाएंगे। उसके बाद बीएलओ को वितरण के लिए उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
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