जयंत चौधरी और सत्यपाल सिंह का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बागपत लोकसभा सीट पर इस बार दिग्गजों की साख भी दांव पर लगी है। लोकसभा की प्रत्येक सीट पर भाजपा के विधायक काबिज हैं। इसके अलावा बड़ौत नगर पालिका समेत अन्य कई नगर पंचायतों में भी भाजपा के अध्यक्ष हैं। देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा नेताओं के क्षेत्र में नतीजे क्या कहते हैं।
छपरौली विधानसभा में भाजपा विधायक सहेंद्र सिंह रमाला, बड़ौत में भाजपा विधायक केपी मलिक, बागपत विधानसभा में भाजपा विधायक योगेश धामा, मोदीनगर विधानसभा में डा. मंजू सिवाच और सिवालखास सीट पर भाजपा विधायक जितेंद्र सतवाई काबिज हैं। ऐसे में लोकसभा चुनाव में इन दिग्गजों की साख दांव पर लगी हेागी। बड़ौत नगर पालिका में भाजपा के अमित राणा अध्यक्ष हैं। लोकसभा क्षेत्र की यह सबसे बड़ी पालिका है। इसके अलावा यहां से चुनाव लड़े केंद्रीय राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह भी विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच गए। विकास के नाम पर उन्होंने चुनाव लड़ा। देखने वाली बात यह होगी कि नतीजे क्या कहते हैं।
पीएम से लेकर सीएम तक ने भरी हुंकार
बागपत लोकसभा चुनाव को लेकर पिछले एक साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बागपत पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच बार जिले का दौरा किया। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी पांच बार आए। इसके अलावा अन्य मंत्रियों के दौरे भी लगातार हुए।
कितनी सही साबित होगी जयंत की उम्मीदवारी
गठबंधन में शामिल होने के बाद चुनाव लड़े रालोद ने इस बार बागपत से उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को मैदान में उतारा था। रालोद अध्यक्ष अजित सिंह खुद चुनाव लड़ने मुजफ्फरनगर गए। देखने वाली बात यह होगी कि रालोद का यह कदम कितना सही साबित होगा। कांग्रेस ने इन दोनों सीटों पर ही उम्मीदवार नहीं उतारे थे। जयंत चौधरी का भले ही बागपत से यह पहला चुनाव रहा हो, लेकिन उनके पिता चौधरी अजित सिंह ने यहां से आठ चुनाव लड़े और वह छह बार बागपत से चुनाव जीते हैं। इस बार यहां पर अजित सिंह और जयंत चौधरी की साख भी दांव पर है।
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