नियंत्रण के उपाय
इस कीट का आक्रमण होने पर पटाखे, ढोल, नगाड़ा, थाली और डीजे आदि बजाकर और शोर मचाकर कीटों को खेत में अथवा पेड़ पौधों पर बैठने न दिया जाए।
खेत किनारे गहरी नालियां बनाकर उनमें गिरने वाले टिड्ढी के शिशु निंफ को मिट्टी से दबा दिया जाए। लाइट ट्रैप का प्रयोग कर नष्ट किया जाए।
टिड्डी दल शाम को 5 बजे से 7 बजे के आसपास जमीन पर बैठ जाता है। सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरता है। इसके बैठने की अवधि में ही कीटनाशकों का छिड़काव कर इसे मारा जा सकता है।
रासायनिक उपचार
- इस कीट के उपचार हेतु मेलाथियान 96 प्रतिशत का छिड़काव करना चाहिए।
- क्लोरोपाइरीफोस 20 प्रतिशत ईसी की डेढ़ लीटर मात्रा या क्लोरोपाइरीफोस 50 प्रतिशत प्लस साइपरमेथ्रिन 5 फीसदी की 500 एमएल मात्रा अथवा लेमडासायहेलोथरीन 5 फीसदी की 500 एमएल मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जाए।
- मेलाथियान 5 फीसदी धूल या फेनवेनरेट 0.5 फीसदी धूल 25 किलोग्राम अथवा क्लोरोपाइरीफोस 10 फीसदी धूल 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से डस्टिंग कराई जाए।
कंट्रोल रूम में शिकायत करें किसान
कीट का प्रवेश होने पर जनपद में तकनीकी क्षेत्रीय कर्मचारियों से संपर्क स्थापित कर नियंत्रण के संबंध में जानकारी लेकर कीट का नियंत्रण किया जाए। मेरठ में 24 घंटे किसानों द्वारा टिड्डी आक्रमण की सूचना के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। किसान कंट्रोल रूम नंबर 0121- 2660600 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।