कोरोना वायरस की महामारी को देखते हुए जहां 21 मार्च को जनता कर्फ्यू रहा, वहीं 22 मार्च से लॉकडाउन शुरू होने के बाद अधिकांश जनता और वाहन चालक अपने घरों के अंदर ही रह रहे हैं। कारोबार भले ही कितने ही करोड़ का प्रभावित हो रहा हो, लेकिन मेरठ की सड़कों पर एक दिन में करीब पांच करोड़ रुपये का डीजल व पेट्रोल धुआं होने से बच रहा है।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, जिले में 7.7 लाख वाहनों का रजिस्ट्रेशन है। जबकि एक लाख से अधिक वाहन ऐसे हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन दूसरे जिलों अथवा राज्यों में है। शनिवार 28 मार्च तक पेट्रोल व डीजल खरीद न होने से यह राशि 35 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
रोजाना 15 हजार लीटर डीजल खर्च
जिले की सड़कों पर प्रत्येक दिन औसतन 10,000 ट्रकों का आवागमन होता है। जिसमें एक दिन में एक ट्रक में करीब 25 लीटर डीजल खर्च होता है। रोडवेज बसों के आवागमन की संख्या 2000 से अधिक है।
एक दिन में एक बस में 20 लीटर डीजल खर्च होता है। 40,000 दो पहिया वाहन आते-जाते हैं। जबकि कारों के आवागमन की संख्या 80,000 है एक कार में एक दिन में चार लीटर डीजल/पेट्रोल खर्च होता है। ऑटो/टेंपो की संख्या 12,000 है, जिनमें एक दिन में एक ऑटो में चार लीटर डीजल खर्च होता है।
हाईवे और शहर की सड़कों पर एक हजार से अधिक टैक्सी भी दौड़ती हैं। एक टैक्सी में आठ लीटर तेल खर्च होता है। ट्रैक्टर व अन्य वाहनों की संख्या पांच हजार है। इनमें एक दिन में 15 लीटर डीजल खर्च होता है।
एक दिन का वाहनों का आवागमन
ट्रक 10,000
रोडवेज व निजी बस 2,000
दो पहिया वाहन 40,000
कार 80,000
टेंपो/ऑटो 12,000
टैक्सी 1000
ट्रैक्टर/अन्य वाहन 5000
प्रतिदिन वाहनों में खर्च होने वाला पेट्रोल-डीजल का खर्च
ट्रकों 1.50 लाख
बस 24 लाख
दो पहिया वाहन 20 लाख
कारों 2 करोड़ 20 लाख
टेंपो 36 लाख
टैक्सी 5 लाख
ट्रैक्टर व अन्य वाहन 45 लाख