मेरठ। बोर्ड बैठक में निगम कर्मचारी और पार्षदों के बीच हुआ विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। पार्षदों ने निगम के प्रत्येक विभाग का लेखाजोखा मांग लिया है, वहीं निगम में भ्रष्टाचार की शिकायत शासन को भेज दी है। वहीं, महिला पार्षदों ने नगर निगम परिसर स्थित पार्षद कक्ष में बैठक कर दोनों लिपिकों के बर्खास्त करने की मांग की।
27 अगस्त को टाउन हॉल के तिलक भवन में नगर निगम की बोर्ड बैठक थी। इसमें भगवतपुरा की महिलाओं और लोगों ने सदन में आकर हंगामा किया था। पार्षदों ने दो लिपिकों राजेश और हरबीर पर गाली देने का आरोप लगाया था। हंगामे के बाद बोर्ड बैठक स्थगित कर दी गई थी। शुक्रवार को सर्वदलीय महिला पार्षदों ने बैठक की। हालांकि अध्यक्षता भाजपा पार्षद दल नेता विपिन जिंदल और बसपा, सपा, कांग्रेस पार्षद दल से रंजन शर्मा ने की। पार्षद बीना गर्ग एडवोकेट ने कहा कि दोनों लिपिकों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। नाजरीन शाहिद ने कहा कि दो साल का कार्यकाल होने वाला है। इन्हीं हंगामों के कारण शहर में विकास नहीं हो पाया है। हमारी एक बहन ने नगरायुक्त पर चूड़ी इसी नाराजगी में फेंकी थी। शिखा सिंहल ने कहा कि सदन में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। दोनों लिपिकों को बर्खास्त किया जाना चाहिए। प्रिया शाक्य, रेनू सैनी, राजकुमारी चांदना, डिंपल चौधरी ने भी सदन में गालीगलौज की निंदा की। बैठक में पार्षद सितारा, नीलम शर्मा, पूनम गुप्ता, स्वाति बंसल, शिखा, दीपिका गुप्ता, सुनीता प्रजापति, सलमा मलिक, जहारा, जैबुन्निशा, जरीना, साबरा, नासरीन, शकीला आदि मौजूद रहीं।
महापौर को सौंपा ज्ञापन
बैठक के बाद परिसर में स्थित कार्यालय पहुंचकर महापौर सुनीता वर्मा को ज्ञापन सौंपा। इसमें कहा गया कि सदन में बाहरी लोगों की भीड़ लगी रहती है। भीड़ में शामिल कुछ लोग महिलाओं की ओर इशारा करके गलत टिप्पणी करते हैं। 27 अगस्त की बैठक में भी ऐसा ही हुआ। लिपिक राजेश और हरबीर ने असामाजिक तत्वोें को बुलाया था, काफी लोग नशे में थे। वे पार्षदों को गालियां दे रहे थे। मारपीट पर उतारू थे। बैठक में बाहरी लोगों पर प्रतिबंध लगाया जाए। सदन में आने वाले सभी पार्षद और प्रतिनिधियों को आईकार्ड जारी किए जाएं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए तिलक हॉल में प्रतिनिधियों को बैठने की अनुमति दी जाए। सभी विभागों के कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराई जाए। स्थायी सफाई कर्मचारियों की बीट यानी कार्य स्थल सार्वजनिक किया जाए। 23 कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति किस आधार पर की गई, वेतन कैसे दिया जा रहा है, ब्यौरा दिया जाए। निगम की गाड़ियों को प्रतिदिन कितना तेल दिया जाता है, बताया जाए। कहा कि सदन में आसन पर बैठने का अधिकार केवल अध्यक्ष का है। लेकिन कर्मचारी आसन को घेरकर खड़े हो जाते हैं। ऐसे कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है। महिला पार्षदों की मांग जायज है। इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। - सुनीता वर्मा, महापौर
कर्मचारियों ने भी पार्षदों के खिलाफ खोला मोर्चा
मेरठ। निगम कर्मचारियों की संयुक्त समिति ने शुक्रवार को बैठक की। अध्यक्ष अनीस अहमद और महामंत्री आलोक शर्मा ने नगरायुक्त को पत्र भेजकर कहा कि वार्ड तीन के पार्षद राजकुमार के साथ महिला पार्षदों के पति ने भी बाहरी लोगों के साथ सदन में हंगामा किया। कर्मचारियों के लिए जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया। निगम एक्ट के मुताबिक ऐसे पार्षद की सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए। नगरायुक्त पर चूड़ियां फेंकने वाली महिला पार्षदों पर भी सख्त कार्रवाई की संस्तुति की जानी चाहिए। अगर किसी भी कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की तो हड़ताल की जाएगी।
स्वास्थ्य लिपिक ने टैक्स विभाग में किया ज्वाइन
मेरठ। वहीं स्वास्थ्य लिपिक रहे गालीगलौज के आरोपी लिपिक राजेश कुमार ने कंरकखेड़ा जोन में टैक्स विभाग में ज्वाइन कर लिया। राजेश कुमार का कहना है कि उन पर लगाए सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने सदन में सभी पार्षदों से माफी मांग ली थी।