विवि के छात्रनेता प्रशांत उर्फ रोबिन चौधरी की हत्या के मामले में एसएसपी ने मेडिकल थाने के सिपाही को लाइन हाजिर कर दिया। वहीं पुलिस नामजद समाजवादी छात्रसभा के नेता पंकज प्रधान समेत तीनों नामजदों को छोड़कर आशू यादव पर फोकस बनाए हुए है।
जागृति विहार सेक्टर-तीन निवासी छात्रनेता प्रशांत उर्फ रोबिन चौधरी की 29 जून की रात को तेजगढ़ी पर ऑल इज वेल होटल के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतक के चाचा इंद्रपाल सिंह ने समाजवादी छात्रसभा के नेता पंकज प्रधान, मयंक स्याल और टिल्लू पंडित व दो-तीन अज्ञात के खिलाफ मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जांच में पता चला कि मेडिकल थाने का सिपाही नरेश यादव भी होटल में पार्टी के वक्त सादे कपड़ों में मौजूद था, जबकि एसओ मेडिकल ने नरेश को घटना स्थल से आधा किमी दूर मिमहेंस तिराहे पर ड्यूटी पर दर्शाया है।
शनिवार रात एसएसपी जे रविंदर गौड़ ने सिपाही नरेश यादव की भूमिका को देखते हुए लाइन हाजिर कर दिया। नरेश की आशू यादव से रिश्तेदारी है साथ ही नरेश की मेडिकल में री-पोस्टिंग बताई गई है। वहीं घटना के बाद एसपी सिटी ओपी सिंह और सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार ने यू टर्न लेते हुए कहा कि प्रशांत की हत्या आशू यादव ने अपनी पिस्टल से गोली मारकर की, जिसमें पहले प्रशांत ने आशू पर गोली चलाई। अपने पर हमला होता देखकर आशू ने प्रशांत की हत्या की है। पंकज प्रधान प्रशांत को बुलाकर ले गया था, वहीं पार्टी में मयंक स्याल, टिल्लू पंडित और जागृति विहार के अमन हॉस्पिटल प्रकरण में जेल से छूटा गैंगरेप का आरोपी अमित उर्फ मरिंडा भी था।
नेता के इशारे में पुलिस खामोश
सीओ सिविल लाइन बीएस वीर कुमार के नेतृत्व में एसओ मेडिकल रविंद्र वशिष्ठ और क्राइम ब्रांच की टीम को एसएसपी ने घटना के खुलासे के लिए लगाया था। नामजद आरोपी पंकज प्रधान की एक नेता से नजदीकी है। मृतक के परिजनों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से रोष है। माना जा रहा है कि पुलिस नेता के इशारे पर नामजद तीनों को बचाने की कोशिश कर रही है।