शासन में अटका नगर निगम का सीमा विस्तार
मेरठ। नगर निगम का सीमा विस्तार पिछले चार साल से शासन की फाइलों में ही अटककर रह गया है। इस बीच आसपास के कई गांव शहर के बीच आ गए हैं। शहरीकरण की जरूरतों को देखते हुए नगर निगम का सीमा विस्तार किया जाना बेहद जरूरी है।
शासन ने चार साल पहले नगर निगम के सीमा विस्तार का प्रस्ताव मांगा था। इस पर नगर निगम ने मेरठ शहर के सीमा विस्तार हेतु कमेटी गठित कराकर सर्वे कराया था। शासनादेश 31 जनवरी 2015 में सीमा विस्तार संबंधी दिए गए मानकों के अनुरूप नगर निगम सीमा से लगे 26 राजस्व गांवों में नगरीकरण के लिए पात्र पाते हुए इन्हें नगर निगम मेरठ की सीमा में सम्मलित करते हुए नगर निगम बोर्ड बैठक में गत 6 अगस्त 2016 को पास कराया था। इसके बाद तत्कालीन मंडलायुक्त आलोक सिन्हा ने गत 19 सितंबर 2016 को सीमा विस्तार का प्रस्ताव प्रमुख सचिव नगर विकास अनुभाग सात के पास भेज दिया था। लेकिन तब से अब तक चार साल बीतने के बाद भी शासन ने इसकी मंजूरी नहीं दी है।
ये गांव किए गए हैं सीमा विस्तार प्रस्ताव में शामिल
हाजीपुर, बजौट, जुर्रानपुर, जलालपुर, महरौली, अमीनगर उर्फ भूड़बराल, मोहिउद्दीनपुर, गगौल, मोहम्मदपुर गूमी, शकरपुर, अल्लीपुर जिजमाना, घाट, पांचली खुर्द, अम्हैडा आदिपुर, सलारपुर आदिपुर, रजपुरा, कमालपुर, दतावली गैसूपुर, राली चौहान, मामेपुर, हसनपुर कदीम, सिंघावली, पावली खास, सिवाया जमालुल्लापुर, दुल्हैडा चौहान और जेवरी आदि गांव सीमा विस्तार प्रस्ताव में शामिल किए गए हैं।
शासन से ही आएगा जवाब
शासन ने चार साल पहले सीमा विस्तार का प्रस्ताव मांगा था, मगर अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इस संबंध में शासन से ही जवाब आएगा। -राजेश कुमार, संपत्ति अधिकारी नगर निगम