संस्कार भारती के कवि सम्मेलन में गूंजे 1857 के वीर और भगत सिंह के तराने
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दिल्ली रोड स्थित जगदीश मंडप में संस्कार भारती महानगर का अखिल भारतीय कवि सम्मेलन 1857 की क्रांति के अमर शहीदों को समर्पित रहा। मंच पर कवि डॉ. हरिओम पंवार ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि नया खून है, नई जवानी, तेवर भी न पुराना है, राष्ट्र धर्म के हित के लिए सीखा हंसते हंसते जल जाना है आदि पंक्ति पढ़ी। सभागार में देशभक्ति का ऐसा उफान उठा कि श्रोताओं ने खड़े होकर तालियां बजाईं।
कार्यक्रम का शुभारंभ नगर निगम आयुक्त सौरभ गंगवार और एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन से किया। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी रहे। कवयित्री कोमल रस्तोगी ने भगत सिंह को याद करते हुए कहा रंग दे बसंती चोला गा के फंदा चूम लिया, अमरत्व की वो मशाल हैं भगत सिंह। गीतकार डॉ. रामगोपाल भारतीय ने कहा कि है यही आरजू फिर जनम लेंगे हम, फिर तिरंगा मिलेगा कफ़न के लिए आदि पंक्तियों ने हर आंख को नम कर दिया। इस बीच शहर के चर्चित कवि सुमनेश सुमन ने कश्मीरी पंडितों की पीड़ा को स्वर देते हुए कहा कि कश्मीर के जन जन में अब राष्ट्रवाद का स्वर दे दो, हर विस्थापित कश्मीरी पंडित को उसका घर दे दो। हर कवि की पंक्तियों के साथ श्रोताओं में देशप्रेम की ये आग गरमाती रही।