आर्थिक हानि तो हो ही रही है
गंगाजल सप्लाई में देरी भी हो रही है। सबसे ज्यादा जिम्मेदार पाइप लाइन में लीकेज को माना जा रहा है। यह भी स्पष्ट है कि अगर टेलीकॉम कंपनियों ने केबिल डालते समय गंभीरता नहीं बरती तो इसी तरह पानी की लाइन में बोर होते रहेंगे और गंगाजल सप्लाई में देरी होगी। जनता को भी साफ गंगाजल पीने को नहीं मिलेगा।
सर्किट हाउस गेट से घुली मिट्टी
पिछले सप्ताह प्रतिभा कंपनी द्वारा सर्किट हाउस जलाशय से शुरू की गई गंगाजल की सप्लाई के दौरान घरों तक पहुंची मिट्टी सर्किट हाउस गेट के निकट टूटी पाइप लाइन से आयी थी। इसका खुलासा शुक्रवार को उस समय हुआ, जब प्रतिभा कंपनी के कर्मचारी सड़क खोदकर पाइप लाइन लीकेज ढूंढ रहे थे।
पाया गया कि पाइप लाइन डलने के बाद एक टेलीकॉम कंपनी द्वारा डाली गई केबिल पाइप में बोर करके डाल दी गई। पाइप लाइन में जहां बोर मिला, वहीं केबिल भी पाया गया। साफ हो गया कि गंगाजल में मिट्टी भोले की झाल से नहीं बल्कि सर्किट हाउस गेट के निकट तोड़ी गई पाइप लाइन से आयी थी। जिसके कारण बीच में गंगाजल सप्लाई बंद की गई।
महापौर ने फटकारा तो निकाला केबिल
मौके पर पहुंचे महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने टेलीकॉम कंपनी के एके राणा और रामपति सिंह को वहीं बुला लिया। महापौर ने इन अधिकारियों को चेतावनी दी कि नगर निगम और जल निगम को सूचना दिए बिना शहर में केबिल न डाला जाए। वहीं, तत्काल पाइप लाइन से केबिल बाहर निकालने के निर्देश दिए।
उन्होंने जलकल के सहायक अभियंता दीपक सक्सेना को टेलीकॉम कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। महापौर ने कहा कि छह मई तक हर कीमत पर गंगाजल की सप्लाई शुरू की जाएगी। इस दौरान अधिशासी अभियंता रामहेत सिंह, पार्षद राकेश शर्मा, हरीश कुमार, तहसीन अंसारी, संजीव पुंडीर मौजूद रहे।
10 दिन में ठीक नहीं हुई एक लीकेज
टेलीकॉम कंपनी के कर्मचारियों को पाइप लाइन ठीक करने में 10 दिन से अधिक समय बीत चुका है। जबकि एक अन्य स्थान पर लीकेज होना माना जा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब एक लीकेज को ठीक करने में 10 दिन से अधिक समय लगेगा तो एक से अधिक लीकेज को ठीक करने में कितना समय लगेगा। ऐसी स्थिति में गंगाजल सप्लाई शुरू ही नहीं हो पाएगी।