आरोप है कि जब उनसे बातचीत की गई तो उसे बताया गया कि विजय शर्मा कोई दोषी नहीं है। अगर आपको इसको छुड़वाना है तो दो लाख रुपये देने होंगे। आरोप है कि एएसपी ने कहा कि दो लाख रुपये नहीं दिए तो मुकदमे में फंसा देंगे। सुबह तक इंतजाम कर लो।
जिस पर सुबह चौकी इंचार्ज राधेमोहन नगर राधेश्याम ने कहा कि एसएचओ शीला चौधरी को सीओ बॉर्डर ने केस बनाने के लिए कह दिया है। उपरोक्त सभी पुलिस वालाें और दो अज्ञात पुलिसकर्मी जिन्हें मैं सामने आने पर पहचान सकती हूं, उन्होंने मेरे सामने भाई के साथ मारपीट की। जिससे उनके भाई के शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं।
शिकायती पत्र के अनुसार दो दिन तक अवैध हिरासत में रखने के बाद आठ सितंबर को सीजेएम गाजियाबाद के न्यायालय में पेश किया गया। जिसकी मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया कि विजय शर्मा के शरीर पर गंभीर चोटें, सूजन, कई फ्रैक्चर पाए गए। जिसकी शिकायत पुलिस अफसरों से गई थी। पुलिस अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर अदालत में अर्जी दी गयी। सुनवाई के बाद स्पेशल जज भ्रष्टाचार अधिनियम ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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