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पिछले सालों की तुलना में कम हुआ प्रदूषण 

Sat, 21 Oct 2017 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : meerut
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई पटाखों की बिक्री पर रोक के बाद दुकानों पर तो पटाखे नहीं दिखे, लेकिन दीपावली पर लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। इस कारण शहर के सभी इलाकों में ध्वनि प्रदूषण बढ़ गया। इस दौरान शहर में कैंट अस्पताल में सबसे कम तो थापरनगर में सबसे अधिक प्रदूषण रहा।
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पटाखों की बिक्री पर रोक लगने के बाद इस दीपावली प्रदूषण कितना कम हुआ, इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के आठ स्थानों पर प्रदूषण की मात्रा जांची। इनमें कैंट अस्पताल एरिया, कलक्ट्रेट, रेलवे रोड, बेगम ब्रिज, थापर नगर, शास्त्रीनगर, कैंटोमेंट बोर्ड और पल्लवपुरम को शामिल किया गया। रिपोर्ट में सभी स्थानों पर सामान्य से अधिक मात्रा में ध्वनि प्रदूषण मिला। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस साल थोड़ी गिरावट दर्ज की गई।

ये रही इस दीपावली पर स्थिति 
स्थान                 दीपावली से पहले         दीपावली के दिन
कैंट अस्पताल        49.2                           52.8  
कलक्ट्रेट              58.4                             70.6  
रेलवे रोड              64.6                            78.5  
बेगम ब्रिज             67.5                            79.6  
थापर नगर             54.5                            80.2  
शास्त्रीनगर             54.6                           75.4  
कैंटोनमेंट बोर्ड          50.2                           58.7  
पल्लवपुरम             57.4                          72.2   
(ध्वनि प्रदूषण डेसिबल में)

पिछले साल ये रही थी स्थिति 
स्थान                दीपावली से पहले            दीपावली के दिन  
कैंट हॉस्पिटल     51.3                 55.9 
कलक्ट्रेट          62.2                 75.3 
रेलवे रोड          68.8                85.1  
बेगम ब्रिज         70.4                84.9 
थापरनगर         55.3                80.1 
शास्त्रीनगर        56.6                79.8  
कैंटोनमेंट बोर्ड     52.3                 60.4  
पल्लवपुरम          60.2                  78.1  
(ध्वनि प्रदूषण डेसिबल में)

2012 से 2015 में इतना था प्रदूषण
क्षेत्र                   श्रेणी               2015       2014       2013           2012
कैंट अस्पताल         संवेदनशील       52.5             51.8         52.2            63.4  
कलक्ट्रेट              संवेदनशील         72.4              -                    -                -
रेलवे रोड              कॉमर्शियल         80.4              67.6          68.2           80.2  
बेगम पुल             कॉमर्शियल         78.2               80.5          82.2         81.0  
थापर नगर             आवासीय         75.9               78.7         79.9             80.6  
शास्त्रीनगर            आवासीय        75.9                 77.2         78.9             80.0     
कैंटोनमेंट बोर्ड      आवासीय     61.2                      51.8         67.3          65.6     
पल्लवपुरम          आवासीय       73.9               70.4          66.9             71.6    
(ध्वनि प्रदूषण डेसिबल में)



ये होना चाहिए मानक
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार संवेदनशील क्षेत्र में दिन में 50 और रात में 40, आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45, कॉमर्शियल क्षेत्र में दिन में 65 और रात में 55, इंडस्ट्रीज एरिया में दिन में 75 और रात में 70 डेसिबल होना चाहिए।
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ये होती है परेशानी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार लाउड स्पीकर, बैंड बाजे, प्रेशर हार्न एवं पटाखों आदि का प्रयोग खुलेआम ध्वनि प्रदूषण की समस्या उत्पन्न करते हैं। इसका सीधा प्रभाव मानव मस्तिष्क, श्रवण शक्ति एवं पाचन तंत्र पर पड़ता है। जिसमें घबराहट, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, तनाव, नींद में कमी, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मानसिक क्षमता में कमी, अल्सर एवं बहरापन आदि गंभीर रोग हो सकते हैं।

दीपावली के दिन शाम को 6 बजे से रात 12 बजे तक प्रदूषण लेबल की जांच की गई। दीपावली से पहले 12 अक्तूबर को शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक जांच की। इस बार गत वर्षों के मुकाबले प्रदूषण की मात्रा थोड़ा कम हुई है, लेकिन सभी स्थानों पर सामान्य से अधिक है।  आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
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