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लगेंगी आपको सदियां हमें भुलाने में

Fri, 20 Jul 2018 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इतने बदनाम हुए हैं हम तो इस जमाने में, लगेंगी आपको सदियां हमें भुलाने में..। काव्य जगत में शब्दों का स्वर्णकाल सफर पूरा करने वाले पद्मभूषण महाकवि डॉ. गोपालदास नीरज के  महाप्रयाण से संपूर्ण साहित्य संसार में शोक की लहर दौड़ गई। शब्दों के इस विशाल हिमालय ने कई बार मेरठ के काव्य प्रेमियों के गले को अपने गीतों से तर किया। अमर उजाला के विशाल अभियान मां तुझे प्रणाम के तहत जिमखाना मैदान में हुए कवि सम्मेलन का मंच उनकी उपस्थिति का साक्षी बना। स्वास्थ्य खराब होने के बाद भी नीरज अंत तक मंच पर बैठे और रात दो बजे अपना काव्यपाठ शुरू किया। उन्हें सुनने के लिए श्रोता रातभर कुर्सियों पर जमे रहे। माइक संभालते ही नीरज ने अपने प्रख्यात गीत ‘कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे’ पढ़ा तो श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। इसके बाद तो उनके प्रेमगीतों का सिलसिला रात के तीसरे पहर तक जारी रहा। इसमें केवल नीरज के गीत थे और उन्हें दिल से सुनने वाले श्रोता।
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वाणी फाउंडेशन क ी काव्य संध्या स्थगित
वाणी फाउंडेशन की ओर से स्व. विश्वम्भर सहाय प्रेमी जी की 119वीं जयंती पर जगदीश मंडप में काव्य संध्या का आयोजन था। आयोजन शुरू होने से पहले ही कवि गोपलदास नीरज के देहांत की सूचना आ गई, इसके कारण काव्य संध्या स्थगित कर दी गई। इस दौरान कवि गजेंद्र प्रियांशु ने उनके चर्चित गीत कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे सुनाकर उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित की। मौन व शोकसभा के साथ आयोजन स्थगित कर दिया गया। आयोजन की नई तिथि की घोषणा दो-तीन दिनों में होगी। आयोजन सचिव अजय प्रेमी व अन्य कवियों ने कार्यक्रम स्थगन की सूचना दी। 


उन्हें भूलना असंभव
काव्य जगत का सबसे बड़ा आशीषदाता, साहित्य और गीतों के राजा कवि गोपालदास नीरज चले गए। आने वाली पीढ़ियां उनके गीतों को कभी नहीं भुला पाएंगी। उनके साथ कई मंचों को साझा कर चुका हूं। वो मंच पर नए कवियों को पूरा सम्मान देते थे। उनक ा जाना क ाव्य समाज की बड़ी हानि है। -वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पवार
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हिंदी मंचों के थे सिरमौर 
नीरज जी हिंदी मंचों के सिरमौर कवि थे। उन्होंने करीब 80 साल तक हिंदी मंचों की सेवा की। फिल्मों में भी वो हिट रहे। मेरा नाम जोकर से लेकर तमाम फिल्मों के लिए उन्होंने सुपरहिट गीत लिखे। इसके बाद भी उनका अंदाज फकीराना था। उनके साथ का एक संस्मरण जो कभी नहीं भूल सकता। सर्दी के दिनों में ग्रेटर नोएडा में एक कवि सम्मेलन चल रहा था। नीरज जी मौजूद थे। आयोजन में हमें शॉल दिया गया। नीरज जी उस शॉल से स्वयं को ढककर ऐसे बैठ गए जैसे कोई नई दुल्हन शरमाई-सकुचाई सी बैठी हो। उन्हें देखकर मैंने जब यह बात कही तो वो मुस्कुरा दिए। -कवि डॉ. सुनील जोगी 


मंच पर महसूस नहीं होने देते अकेलापन
नीरज जी का जाना शब्द साहित्य के संसार के एक सितारे का अस्त हो जाना है। मंचों पर कई बार उनसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। दो से तीन बार उनसे भेंट हुई। वो साहित्य का समंदर थे और छोटे कवियों को हमेशा स्नेह देते थे। उनके गीत और प्यार अविस्मरणीय है। -कवि गजेंद्र प्रियांशु, बाराबंकी

अलौकिक प्रकाश में लुप्त हुआ सितारा
कवि गोपालदास नीरज बेशकीमती मोती थे। जो साहित्य जगत में चमकते रहे। आज अलौकिक प्रकाश में लुप्त हो गए। उनका जाना बड़ी क्षति है। हमें बहुत दुख है। -कवियत्री सीता सागर 

कविता गीत के युग का अवस्थान
नीरज जी का जाना कविता गीत के एक युग का अवस्थान है। उनके काव्यपाठ का अंदाज श्रेष्ठ ही नहीं बल्कि जुदा था। गीतों में श्रृंगार रस का अलौकिक पुट है। शब्द शैली भी सबसे भिन्न रही है। उनका जाना साहित्य जगत की बड़ी क्षति है। उनका स्थान कोई नहीं ले सकता। -कवि डॉ. प्रवीण शुक्ल
 
नौचंदी मेले में हमेशा मिला उनका साथ
कवि गोपालदास नीरज शब्दों क ा हिमालय थे। नौचंदी मेले से उन्हें विशेष लगाव था। कई बार नौचंदी मेले के कवि सम्मेलन में उन्होंने शहरवासियों को अपने गीतों से सिक्त किया। रामप्रकाश राकेश जब नौचंदी मेले में कवि सम्मेलनों के संयोजक होते थे तब नीरज जी मेरठ जरूर आते थे। महाकवि पंडित ताराचंद हारीत के 1957 में प्रकाशित महाकाव्य दमयंती की भूमिका स्वयं नीरज जी ने लिखी थी। -कवि सुमनेश सुमन 
 
चला गया साहित्य का चितेरा 
पद्मभूषण सुशोभित महाकवि गोपालदास नीरज का जाना साहित्य जगत की बड़ी क्षति है। शब्द साहित्य का बड़ा चितेरा मौन में विलीन हो गया। उनके गीतों से वे सदैव आने वाली पीढ़ियों के हृदय में जीवित रहेंगे। -अनामिका अंबर, कवियत्री 

एक बड़ा इंसान, बड़ा कवि दुनिया से रुखसत हो गया। उसकी भरपाई साहित्य जगत शायद ही कर पाए। वह उर्दू हिंदी मंचों की शान थे। यह उनके सिद्धांत ही थे कि मुंबई का रुख करने केबाद वह फिर से कविता और शायरी के मंचों की ओर लौट आए। -पापुलर मेरठी, शायर
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