मृतक शैंकी की मां व घर में मौजूद पड़ोसी महिला
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जंधेड़ी, मवाना निवासी विरमवती समाज के लिए मिसाल हैं। 23 वर्षीय इकलौते बेटे को ऑनर किलिंग में खोने के बावजूद उन्होंने उसके प्यार को नई जिंदगी दी। शालू भी शैंकी की मां के प्रति समर्पित थी। घरवालों से बगावत कर उनके साथ रहने लगी। छह जुलाई 2019 को विरमवती ने अपनी रिश्तेदारी में उसकी शादी कर दी। मां की मर्मांतक पीड़ा है। मुख से निकले बोल दर्द में डूबे हैं। विरमवती अक्सर बीमार रहती हैं।
बताती हैं, शैंकी छह महीने का था, तभी उसके पिता का देहांत हो गया था। एक बेटी भी थी। पशु पालन और खेती कर मैंने बच्चे पाले। शैंकी सीधा-साधा बच्चा था। मैं सोचती थी कि पढ़ लिखकर कुछ बन जाए। अभी तो उसकी पालगत करके भी नहीं हटी थी। ये कहते हुए मां की रुलाई फूट पड़ती है। कुछ क्षण बाद बोलीं, शैंकी मेरठ में प्राइवेट जॉब करता था। वहीं रहता था। कंप्यूटर की कोचिंग भी कर रहा था। उसके प्यार के बारे में मुझे पता था। जाति अलग थी पर मैं शादी के लिए तैयार थी। शुरुआत में शालू के घरवाले भी तैयार थे। शैंकी उनके घर आता-जाता भी था।