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श्रम विभाग ने 16 हजार भवन स्वामियों को नोटिस भेजे

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श्रम विभाग ने 16 हजार भवन स्वामियों को नोटिस भेजे
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मेरठ। श्रम विभाग ने लेबर सेस वसूली के नाम पर शहर के 16 हजार भवन स्वामियों को नोटिस भेजे हैं। एमडीए में सेस जमा कर चुके लोगों को भी नोटिस भेजे गए हैं। संयुक्त व्यापार संघ इसका विरोध कर रहा है। इस मामले में संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को श्रमायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
श्रम विभाग की ओर से मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर और लखनऊ में वर्ष 2009 से वर्ष 2018 के बीच हुए निर्माण का सर्वे कराया था। जिले में 16 हजार नए निर्माण का आंकड़ा सामने आया और लगभग आठ करोड़ रुपयेे की वसूली का लक्ष्य रखा गया। शहर में 16 हजार लोगों को लगभग 15 हजार रुपये से 35 हजार रुपये तक एक प्रतिशत सेस के रुप में जमा करने के नोटिस भेजे गए हैं। एमडीए नक्शा स्वीकृत करने पर वर्ष 2011-12 से सेस वसूल रहा है।
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संयुक्त व्यापार संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कमल ठाकुर ने बताया कि मेरठ में वर्ष 1999 से प्राइवेट कॉलोनियों का निर्माण शुरू हुआ है। श्रम विभाग वर्ष 2009 से 2018 के बीच हुए निर्माण पर सेस मांग रहा है। एमडीए में नक्शा स्वीकृति के समय ही एक प्रतिशत सेस लेना वर्ष 2011-12 में शुरू किया था। इसकी रसीद भी उनके पास हैं। इसलिए सेस जमा न करने वालों को ही नोटिस दिए जाने चाहिएं। संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि अमूमन लोग पत्नी के नाम पर मकान खरीदते हैं और उन्हीं के नाम से नक्शा पास होता है। कागजों में उस व्यक्ति का नाम नहीं होता है, जिसके नाम पर नोटिस भेजे जा रहे हैं। सेस जमा करने वालों को भी नोटिस भेजे जा रहे हैं।
संघ के महामंत्री दलजीत सिंह एवं उपाध्यक्ष सुधीर रस्तौगी ने कहा कि साप्ताहिक बंदी व्यापारियों की इच्छा से होनी चाहिए। व्यापारियों और कर्मचारियों से जुड़ीं योजनाओं का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। श्रमायुक्त को ज्ञापन देने वालों में सुधीर अग्रवाल, अंकुर गोयल, अंकित गुप्ता, राजीव गोयल, अशोक रस्तौगी, रजनीश कौशल आदि लोग मौजूद रहे।
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- सर्वे के आंकड़ों से नहीं मिले एमडीए के आंकड़े
- थर्ड पार्टी द्वारा किए गए सर्वे के आंकड़े एमडीए से मैच नहीं हुए हैं। ऐसे में संपत्ति मालिक को नोटिस भेजा गया है। जो लोग विभागीय कार्यालय में रसीद दिखा रहे हैं। उनके नोटिस निरस्त किए जा रहे हैं। एमडीए की सीमा सीमित है। जिले में बड़ा क्षेत्रफल है जहां एमडीए ने नक्शे स्वीकृत नहीं किए हैं। -- दीप्तमान भट्ट, श्रमायुक्त, मेरठ।
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