जिला अस्पताल के मरीजों को डेंगू और चिकनगुनिया की जांच के लिए अब मेडिकल की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। जिला अस्पताल में जांच करने वाली मशीन आ गई हैं, जिन्हें सेंटिनल लैब में रखा गया है। इनसे डेंगू और चिकनगुनिया की जांच होगी। अभी तक सरकारी लैब के नाम पर सिर्फ मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में ही जांच होती थी। वहां पुष्टि होने पर ही माना जाता था कि मरीज को डेंगू या चिकनगुनिया है या नहीं। जिला अस्पताल में डेंगू और चिकनगुनिया की जांच के लिए एडवांस किट भी मुहैया कराई जाएगी। जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल ने बताया कि सेंटिनल लैब में जांच के लिए एलाइजा रीडर मशीन और लैब टेक्निशियन मिल गए हैं। अब मरीजों को कोई दिक्कत नहीं होगी।
ऐसे फैलता है डेंगू-चिकिनगुनिया
डेंगू और चिकनगुनिया की बीमारी देने वाला एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छर हैं। यह मच्छर सुबह और शाम के वक्त काटते हैं।
यह होंगे टेस्ट
जीनोमिक टेस्ट पीसीआर विधि : चिकनगुनिया बुखार के लक्षण दिखने के एक सप्ताह के अंदर टेस्ट कराया जाए तो पीसीआर विधि से जीनोमिक टेस्ट करा सकते हैं। यह टेस्ट चिकनगुनिया की पक्की जानकारी देता है।
एंटीबॉडीज की जांच : चिकनगुनिया शुरू होने के सात से आठ दिन के बाद शरीर में एंटीबॉडीज बने लगते हैं। एंटीबॉडीज की जांच करके आमतौर पर चिकनगुनिया के लिए टेस्ट किए जाते हैं।
सीबीसी टेस्ट : कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) टेस्ट चिकनगुनिया की शुरुआती जांच के लिए इस टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
एनएस 1 टेस्ट : डेंगू के लक्षण सामने आने पर शुरुआती पांच दिनों के अंदर किया जाना चाहिए, ताकि इसके सार्थक और सटीक परिणाम प्राप्त हो सकें। इसके बाद टेस्ट को करवाने के परिणाम गलत भी आ सकते हैं।
एलाइजा : डेंगू के लिए की जाने वाली यह एक ऐसी जांच है, जिसमें डेंगू की पुष्टि प्रमाणिक रूप से हो जाती है। एलाइजा टेस्ट के परिणाम एनएस 1 की अपेक्षा अधिक प्रमाणिक होते हैं।
डेंगू-चिकनगुनिया
साल डेंगू चिकनगुनिया
2015 205 00
2016 183 1105
2017 660 00