मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सेवाएं ही लाइलाज हो गई हैं। मरीज जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। शनिवार को मेडिकल में इलाज न मिलने से दो मरीजों की जान चली गई।
उन्हें समय पर इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया गया था। घंटों तक एंबुलेंस में ही तड़पते रहे। हालांकि, इस दौरान मेडिकल के निरीक्षण पर पहुंचे डीएम ने कई मरीजों को अपने सामने इमरजेंसी में भर्ती कराया। वहीं एक युवती दर्द से चीखते हुए ओपीडी में लाई गई, लेकिन डॉक्टरों ने तत्काल उसे इमरजेंसी में भर्ती करने को कहा। इसके लिए तीमारदारों को स्ट्रेचर भी नहीं मिला। इन हालात में उसका भाई और अन्य युवक गोद में उठाकर इमरजेंसी ले गए।
डीएम जगतराज त्रिपाठी शनिवार दोपहर करीब 12 बजे मेडिकल कॉलेज में निरीक्षण करने पहुंचे। जब वह इमरजेंसी का दौरा कर बाहर निकले तो उन्हें एंबुलेंस दिखी। उसमें बागपत के मवीकला गांव निवासी बलवीर अपने वायरल से पीड़ित बेटे अमरपाल को लेकर बैठे थे। वह घंटों से ड्रिप लगी बोतल हाथ में लिए बैठे थे, लेकिन चिकित्सकों ने अमरपाल को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया।
जब मरीज के फोटो खिंचने शुरू हुए तो आनन-फानन में स्ट्रेचर मंगवाकर इमरजेंसी ले जाया गया। चिकित्सकों ने काफी देर तक हार्ट को प्रेशर देकर मरीज की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अमरपाल की जान चली गई। पिता बलवीर ने रोते हुए कहा कि अगर समय से इलाज मिल जाता तो शायद मेरा बेटा बच जाता।
वहीं लिसाड़ी गेट निवासी एहसान को परिजन सरस हॉस्पिटल से रेफर कराकर इमरजेंसी पहुंचे। लेकिन, इमरजेंसी में वेंटिलेटर उपलब्ध न होने की बात कहकर भर्ती नहीं किया गया। इमरजेंसी को छोड़कर बाकी वार्ड में मेडिकल के पास वेंटिलेटर हैं। दो घंटे तक परिजन एहसान को बाहर एंबुलेंस में लेकर खड़े रहे। बड़ी मुश्किल से चिकित्सक ने देखा, लेकिन तब तक वह भी दुनिया छोड़ चुका था। परिजनों का कहना था कि अहसान को अस्थमा की बीमारी थी। कुछ दिनों से वायरल से पीड़ित थे।
ओपीडी में तबियत बिगड़ी, नहीं मिला स्ट्रेचर
गांव कैली थाना दौराला निवासी 24 वर्षीय राहुल अपनी बहन प्रीति को दिखाने मेडिकल पहुंचा। अचानक ओपीडी में उसकी तबीयत खराब हो गई। चिकित्सक ने तत्काल इमरजेंसी में भर्ती कराने को कहा।
भाई स्ट्रेचर ढूंढ़ता रहा, लेकिन नहीं मिला। अस्पताल का कोई कर्मचारी मदद को भी नहीं आया। विकास कुमार और एक अन्य मरीज ने मदद की। राहुल के साथ मिलकर दर्द से चीखती प्रीति को गोद में उठाकर इमरजेंसी की तरफ भागे। ओपीडी से इमरजेंसी करीब 800 मीटर की दूरी पर है, करीब 600 मीटर तक तीनों लोग ऐसे ही लेकर चले। इमरजेंसी से करीब 100 मीटर पहले उन्हें एक वार्ड से स्ट्रेचर मिल गया।
तपता रहा बदन, नहीं पसीजा दिल
डासना (गाजियाबाद) निवासी मुनसैदी का मरीज मेडिकल की इमरजेंसी में भर्ती है। शुक्रवार रात से उनकी भी तबीयत खराब हो गई। लेकिन मेडिकल के किसी स्टाफ का दिल नहीं पसीजा। ऐसे में मुनसैदी इमरजेंसी के बाहर पार्किंग में नीचे कपड़ा फैलाकर लेट गई। शरीर बुखार से तप रहा था। लेकिन किसी ने भर्ती करना मुनासिब नहीं समझा। डीएम निरीक्षण करते हुए इमरजेंसी तक पहुंचे तो अचानक उनकी नजर मुनसैदी पर पड़ी। उनके कहने पर उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।