असामान्य मौसम में लानीना के बन रहे असर ने इस साल सामान्य मानसून के संकेत दिए हैं। 36 साल के रिकॉर्ड में अप्रैल का महीना सबसे गर्म माना जा रहा है। दिन-रात का तापमान सामान्य से काफी ऊपर चल रहा है। ऐसे में अलनीनो का असर कम होना राहत दे सकता है।
इस बार सर्दी के सीजन में ही गर्मी की आहट शुरू हो गई थी। जनवरी माह से ही पारा चढ़ना शुरू हो गया था। जो अब अप्रैल में ही भीषण गर्मी की याद दिला रहा है। यह सब वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिग का असर है। मौसम में आ रहे ऐसे बदलाव से वैज्ञानिक ही नहीं, किसान भी चिंतित है। गर्मी की शुरुआत ही ऐसी है तो आगे कैसे फसलों को बचाया जाएगा। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के मौसम विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार पिछले 36 वर्षों में अप्रैल माह पहली बार इतनी गर्म चल रहा है, जब तापमान 41 डिग्री को छू रहा हो। इस तरह के मौसम से प्रकृति के साथ जनमानस भी प्रभावित होता है।
लानीना देगा राहत
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 2010 में मेरठ में 718 एमएम, 2011 में 605 एमएम, 2012 में 727 एमएम, 2013 में 782 एमएम, 2014 में 207 एमएम और 2015 में 439 एमएम बारिश हुई थी। मेरठ में औसत बारिश 625 एमएम मानी जाती है। इस समय लानीना के सक्रिय होने से मानसून के भी अच्छे संकेत मिल रहे है। लानीना जितना सक्रिय होगा, उतना ही मानसून भी अच्छा रहेगा। इस बार छह प्रतिशत अधिक बारिश के आसार हैं।
36 साल का पारा
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 6 अप्रैल 1980 में अधिकतम तापमान 36.9 रहा था। 13 अप्रैल 1997 में अधिकतम तापमान 27.6 डिग्री रहा। जबकि इन 36 साल में 16 अप्रैल 2016 को सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री रहा।
गर्म हवाओं ने छुड़ाए पसीने
सोमवार को अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री जबकि न्यूनतम 22.8 डिग्री रहा। दिन में आसमान से आग बरसी तो शाम होने के बाद भी गर्मी के तेवर कम नहीं हुए। सोमवार सुबह से ही तन को झुलसाने वाली गर्मी पड़नी शुरू हो गई। दोपहर में बाजारों में चहल-पहल रही जबकि हाईवे पर सन्नाटा रहा।
अलनीनो और लानीना
प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के औसत तापमान में वृद्धि को अलनीनो और कमी को लानीना कहा जाता है। यह प्रभाव एक बार बन जाने पर पूरे साल मौसम को प्रभावित करते हैं। अलनीनो दो से 7 साल के अंतराल पर आता रहा है। समुद्री सतह पर एकत्रित होने वाली ऊर्जा बाहर निकलती है। सतह का तापमान पांच डिग्री तक बढ़ जाता है। हवाएं कम होने से मौसम प्रभावित होते हैं। बारिश कम होती है, ठंड ज्यादा होती है। जबकि लानीना का प्रभाव अलनीनो के विपरीत होता है। इसके दो से पांच डिग्री तक तापमान कम हो जाता है। लानीना के प्रभाव से मौसम ज्यादा नम होता है।
कमजोर हो रहा अलनीनो
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून का अनुमान सामान्यत: 20 से 25 अप्रैल के बीच लगाया जाता है। अलनीनो की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। इसके मई तक 0.05 स्केल से नीचे जाने की संभावना है। ऐसी स्थिति में यह मानसून को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करता। लिहाजा इस साल बारिश सामान्य होगी।