जिले के कुत्ते खूंखार हो रहे हैं। 181 दिन में 38 हजार 794 लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने केलिए जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर मारामारी मची हुई है। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो हर रोज करीब 214 से ज्यादा लोग कुत्तों का निशाना बने हैं।
ये वह आंकड़ा है जो स्वास्थ्य विभाग की फाइलों में दर्ज है और इन लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हकीकत इससे भी भयावह है, क्योंकि जिला अस्पताल और सीएचसी पर हर रोज ऐसे लोगों की भी काफी तादाद रहती है जिन्हें एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए बिना ही टरका दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि अस्पताल आने वाले 75-80 प्रतिशत लोगों को ही एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
रेबीज : 19 साल तक मरीज को ले सकता है गिरफ्त में
रेबीज हो जाने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है। यह रोग 19 वर्ष तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। एक समय ऐसा भी था, जब कुत्ते के काटने पर 16 इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे, वह भी पेट में।
डॉक्टर देते हैं कुत्तों का पीछा करने की सलाह
स्वास्थ्य विभाग के पास एंटी रेबीज वैक्सीन पर्याप्त नहीं है। वैक्सीन की किल्लत के कारण इंजेक्शन लगवाने आने वाले मरीजों को डॉक्टर काउंसिलिंग के दौरान कुत्तों का पीछा करने की सलाह तक देते हैं। डॉक्टर मरीज से कहते हैं कि पता करें कि कुत्ता मरा है या नहीं। देहात से आए मरीजों को तो जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगाने से मना कर दिया जाता है। उन्हें सीएचसी पर जाने को कहा जाता है।
साल 2018 का हाल
माह ये बने शिकार
जनवरी 5141
फरवरी 7649
मार्च 8332
अप्रैल 5935
मई 7353
जून 4484
यह बरतें सावधानी
कुत्ता कुछ खा पी रहा हो तो उसके पास न जाएं।
अगर कुत्ते के पिल्ले उसके साथ हों उसके नजदीक न जाएं।
कुत्ते आपस में लड़ रहे हों तो भी उनसे दूर रहें।
सोते हुए कुत्ते को न छेड़ें।
कुत्तों के एकदम नजदीक से भागदौड़ न करें।
बच्चों को भी बताएं, कुत्तों के कान और पूंछ आदि न खींचें।
ऐसे होता है रेबीज
जानवर जैसे कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रेबीज नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। रेबीज रोग सीधे रोगी के मानसिक संतुुलन को खराब कर देता है, जिससे रोगी का अपने दिमाग पर कोई संतुलन नहीं रहता है।
रेबीज रोग के लक्षण
रेबीज रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। रोगी को रोशनी से डर लगता है। यहां तक कि वह भौंकना भी शुरू कर देता है। वह किसी भी बात को लेकर भड़क सकता है।
रेबीज रोग उपचार
रेबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवां 28 दिन के बाद लगाया जाता है।
लाल मिर्च नहीं, इंजेक्शन लगवाएं
कुत्तों के काटने पर खासकर गांवों में मरीज के पिसी हुई मिर्च लगा देते हैं, जो कि गलत है। इससे ठीक होने के बजाय घाव में इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है। कुत्ते या किसी जानवर के काटने पर 72 घंटे के अंदर एंटी रेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन जरूर लगवाएं। - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
मंगाए गई हैं एक हजार वायल
एंटी रेबीज वैक्सीन की पूरे उत्तर प्रदेश में ही कमी है, क्योंकि इसे सरकारी तौर पर सिर्फ एक कंपनी की सप्लाई करती है। फिर भी अपने प्रयासों से मैंने जिला अस्पताल में उपलब्धता बनाई हुई है और एक हजार वायल और मंगाने के लिए डिमांड भेजी है। एंटी रेबीज के तहत नियमानुसार काउंसिलिंग कराई जाती है, ताकि जरूरी व्यक्ति को इंजेक्शन लगाए जा सकें। जिस कुत्ते को रेबीज होता है उसकी मृत्यु तीन दिन के भीतर हो जाती है।
- डॉ. पीके बंसल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल