सॉफ्टवेयर टेक्नालॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) नॉर्थ जोन के निदेशक रजनीश अग्रवाल शुक्रवार को मेरठ में थे। मौका था मेरठ में प्रस्तावित आईटी पार्क में एसटीपीआई सेंटर के लिए मेरठ के अधिकारियों से एमओयू साइन करने का। इस मौके पर उन्होंने ‘अमर उजाला’ से बेबाकी से बात की। कहा कि समय बदल रहा है। तकनीक के इस युग में मेरठ का यह सेंटर इस क्रांतिधरा के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी नई क्रांति बनेगा। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश :
सवाल: एसटीपीआई सेंटर बनने से मेरठ में सीधा और सबसे बड़ा क्या प्रभाव पड़ेगा?
आईटी क्षेत्र से जुड़े युवाओं को यहां नई राहें मिलेंगी। मेरठ तथा आसपास के जिलों के युवा यहीं पर अपने कैरियर की दशा और दिशा तय कर सकेंगे।
सवाल: एनसीआर में नोएडा, गुड़गांव की तरफ स्टूडेंट जा रहे हैं। मेरठ कैसे उनके सामने टिक सकेगा?
हम इस पर काम करेंगे। नोएडा और गुड़गांव एक तरह से सेचुरेटिड हो चुके हैं। ऐसे में वहां के इंटरप्यूनर को मेरठ की तरफ लाया जाएगा। टारगेट पर नोएडा रहेगा।
सवाल: उप्र में कई स्थानों पर आईटी पार्क बन रहे हैं। मेरठ इनसे कैसे अलग होगा?
यह सही है। एसटीपीआई के पूरे भारत में 53 सेंटर हैं। यूपी में कानपुर, लखनऊ, नोएडा व इलाहाबाद में हैं। पाइप लाइन में आगरा, मेरठ तथा गोरखपुर हैं और इन तीनों में मेरठ सबसे पहले है। यानी यह प्रदेश का पांचवां आईटी पार्क होगा। मैं फिर कह रहा हूं कि मेरठ एनसीआर में है। इसी से वह अलग होगा। बाकी सहयोग हम करेंगे।
सवाल: टेक्नालॉजी में नित नए प्रयोग, शोध हो रहे हैं। ऐसे में नया सेंटर खड़ा करना चुनौती साबित नहीं होगा?
चुनौती है पर युवाओं में टैलेंट की कमी नहीं है। हमारा मूल मंत्र है कि ऐसे शोध करो जिससे खुद ही नहीं बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे सको। सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट पर स्पेशल आइडिया वाले छात्रों को हम अलग से सुविधाएं देंगे। फंड देंगे तो सफलता की कहानी अपने आप शुरू हो जाएगी।
सवाल: आईटी कंपनियों को इस क्षेत्र में लाने के लिए क्या प्रयास होंगे?
ताइवान की कई कंपनियों को यमुना एक्सप्रेस वे पर शिफ्ट किया गया है। यह व्यवसाय अब आर्थिक दृष्टि से बहुत बड़ा हो गया है। 16 हजार करोड़ रुपये बीते वित्तीय वर्ष में एक्सपोर्ट के जरिए इस व्यवसाय से कमाए गए। ऐसे में निश्चिंत रहें। मेरठ में भी प्लेटफार्म खड़ा होतेे ही तमाम कंपनियां आएंगी।
युवाओं के भविष्य के लिए बेहतर है आईटी पार्क
मेरठ में पढ़े देव सिंह परिहार आज सिंगापुर में इंजीनियर हैं। इस बारे में उनका कहना है कि यह मेरठ के केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि सभी के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण हो रहा है। यह समझिए कि मेरठ के आईटी ग्रेज्युएट तो यहां से बाहर जाएंगे ही नहीं।
जब उन्हें वहीं बेहतर ऑप्शन मिलेंगे तो वे वहीं अपना कैरियर बनाएंगे। इसका असर न केवल आईटी सेक्टर बल्कि सिनेमा, चिकित्सा व अन्य व्यवसाय पर भी पड़ेगा। लोगों को नौकरी मिलेंगी। इंडस्ट्री आएंगी तो गार्ड चाहिएं। ड्राइवर चाहिएं। हर काम के लिए लोगों की आवश्यकता होती है। वे पुणे का उदाहरण देते हैं। कहते हैं कि यहां एक पूरी इंडस्ट्री डेवलप है और लाखों लोगाें के रोजगार की राह इससे खुली है।
नहीं आए माननीय
आईटी पार्क की एमओयू पर साइन की बैठक में सभी विधायकों, सांसद, तमाम दर्जा प्राप्त राज्य मंत्रियों को बुलाया गया था। इनमें केवल राज्य मद्यपान निषेध परिषद के चेयरमैन कुलदीप उज्जवल को छोड़कर बाकी कोई नहीं आया।