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जानिए, इस माह में सपने में क्यों दिखाई देते हैं भोले शंकर

Mon, 10 Jul 2017 10:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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भोले शंकर
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सावन माह की याद आते ही भगवान भोलेनाथ का नाम भक्तों को याद आने लगता है। यही वह माह है जिस महीने में कांवड़िए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद गंगाजल को जलाभिषेक के लिए मंदिर तक पैदल ले जाते हैं। इस माह में दिन में ही नहीं बल्कि रात के सपने में भी भोलेनाथ याद आते हैं। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिये भक्त नाम जपने के साथ अपने घर परिवार को भी भूल जाते हैं। एक साधु सन्यासी की तरह कांवड़ यात्रा में भक्तों का सैलाब उमड़ता है।
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सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को शिव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव के ध्यान से विशेष लाभ प्राप्त होता है। यह व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किये जाते हैं। व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक समय ही भोजन किया जाता है। साथ ही साथ गले में गौरी-शंकर, रूद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना जाता है।
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कांवड़िए कांवड़ लाते
सावन के महीने में भक्त, गंगा नदी से गोमुख, गंगोत्री, उत्तरकाशी, ऋषिकेश, और हरिद्वार में हरकी पैड़ी से जल उठाते हैं। पवित्र जल को पैदल चलकर लाते हैं। और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सावन माह में जैसे ही कांवड़ यात्रा शुरू होती है तो कावड़ियों को रात के सपने में भी भोलेनाथ के दर्शन होते हैं। भक्त जो है सुबह 3:00 बजे उठकर कांवड़ की धूप जलाकर पूजा करते हैं उसके बाद भोलेनाथ के हाथ जोड़कर विनती करते हैं कि हे भोलेनाथ जो गलती हो गई है मुझे माफ करना मेरी यात्रा आपका नाम लेकर ही चलेगी। आपके नाम के बिना मैं एकटक भी नहीं चल सकता हूं। सुबह से चलकर पूरे दिन भर और पूरी रात तक कावंड़ये भोले का नाम लेकर चलते हैं। शिवरात्रि के दिन मंदिरों में जल चढ़ाकर भक्त भोलेनाथ से मन्नत मांगते हैं।

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