सावन माह की याद आते ही भगवान भोलेनाथ का नाम भक्तों को याद आने लगता है। यही वह माह है जिस महीने में कांवड़िए सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद गंगाजल को जलाभिषेक के लिए मंदिर तक पैदल ले जाते हैं। इस माह में दिन में ही नहीं बल्कि रात के सपने में भी भोलेनाथ याद आते हैं। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिये भक्त नाम जपने के साथ अपने घर परिवार को भी भूल जाते हैं। एक साधु सन्यासी की तरह कांवड़ यात्रा में भक्तों का सैलाब उमड़ता है।
सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को शिव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव के ध्यान से विशेष लाभ प्राप्त होता है। यह व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किये जाते हैं। व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक समय ही भोजन किया जाता है। साथ ही साथ गले में गौरी-शंकर, रूद्राक्ष धारण करना भी शुभ माना जाता है।