पुराने कमेले की जमीन पर अब शिक्षा की बयार बहेगी। यहां बेटियों के जीवन को पंख लगेंगे। उन्हें सामाजिकता का पाठ पढ़ाया जाएगा। कमेले की भूमि पर राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बनकर तैयार हो गया है। एक अप्रैल से एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शिक्षा विभाग की तरफ से शिक्षकों की तैनाती भी की जा रही है। पहले चरण में भूतल पर बन रहे आठ कमरों में कक्षाएं शुरू होंगी।
हापुड़ रोड स्थित पुराने कमेले को कैबिनेट मंत्री आजम खां के निर्देश पर हटाया गया। 6 जनवरी 2014 को राजकीय कन्या बालिका विद्यालय की नींव रखी गई थी। मल्टी सेक्टोरेल डेवलपमेंट प्लान (एमएसडीपी) के तहत इसके लिए दो करोड़ 90 लाख 34 हजार रुपये अवमुक्त कर दिए गए और विद्यालय का निर्माण शुरू हो गया। यहां शुरू में 14 कमरे बनने थे, लेकिन ले आउट के बाद 21 कमरे फाइनल किए गए। नतीजा लागत बढ़ गई और लगभग एक करोड़ रुपया और स्वीकृत किया गया। अब यह भवन जी प्लस टू बनेगा। विद्यालय शुरू होते ही कक्षा छह, नौ और 11 में होंगे प्रवेश लिए जाएंगे।
नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू
विद्यालय के भवन निर्माण का काम अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की निगरानी में चल रहा है। अल्पसंख्यक विभाग शिक्षकों और अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को पत्र लिख चुका है। डीआईओएस श्रवण कुमार यादव ने कहा है कि यदि आयोग नई नियुक्ति नहीं कर पाता है तो दूसरी जगह से स्थानांतरित कर यहां शिक्षकों को तैनात किया जा सकता है। शिक्षकों और अन्य स्टाफ की लिस्ट फाइनल भी हो चुकी है।
पहले चरण में आर्ट साइड में ही दाखिला
पहले चरण में आर्ट साइड की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। डीआईओएस का कहना है कि अभी हमें सिर्फ आठ कमरें मिल रहे हैं, इसलिए आर्ट साइड में ही छात्रों को प्रवेश लिए जाएंगे। सत्र 2017-18 में कॉमर्स व साइंस वर्ग में भी प्रवेश लिए जा सकते हैं।
वर्जन
जिला अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से पत्र मिला है। विद्यालय में स्टाफ तैनात करने की प्रक्रिया चल रही है। बिल्डिंग में कुछ खामियां थीं। अल्पसंख्यक विभाग को जानकारी दे दी थी। खामियां दूर होती ही स्टाफ तैनात कर प्रवेश शुरू कर दिया जाएगा। - श्रवण कुमार यादव, डीआईओएस
अभी दो करोड़ 90 लाख रुपये ही जारी हुए हैं। ऐसे में निर्माण में कमियां हैं, लेकिन भूतल के आठ कमरे पूरी तरह से तैयार हैं। निर्माण संस्था सीएनडीएस ने उन्हें हैंडओवर करने का प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया है। भूतल पर कक्षाएं इसी सत्र से शुरू कराई जा सकती हैं।
- एसएन पांडे, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी