फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किताबें हैं कम, शिक्षा हो रही ‘बेदम’

Tue, 24 Jul 2018 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
सरकारी प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने के दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। एक तरफ जहां निजी स्कूलों में परीक्षाओं की तैयारी चल रही हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में अभी तक बच्चों को सारी किताबें ही नहीं मिल पाई हैं। सोमवार को अमर उजाला टीम ने बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था का हाल देखा। वहां कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के पास बैग तो मिले, लेकिन उनमें किताबें नहीं थीं। वहीं कक्षा छह से आठ तक के बच्चों के पास आधी अधूरी किताबें हैं। विद्यालयों में तैनात शिक्षकों से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि पढ़ाई तो किताबों से होती है। जब किताब ही नहीं तो भला हम क्या पढ़ा सकते हैं। बार बार सूचना मिल रही है कि किताबें जल्द ही स्कूल पहुंच जाएंगी। बता दें कि जनपद में 910 प्राथमिक और 432 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं।
विज्ञापन


पढ़ाई हो रही बाधित
रजपुरा ब्लॉक के गांव मामेपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में सभी शिक्षक कक्षाओं में थे। जबकि प्रधानाध्यापिका अर्चना रानी कक्ष से बाहर ऑफिस का काम करती मिलीं। कक्षाओं में गंदगी पसरी मिली। बिजली न होने के कारण पंखे बंद थे। जब बच्चों के बैग देखे गए तो कुछ के पास किताबें ही नहीं थीं, तो कुछ के बैग में पुरानी किताबें मिलीं। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को अभी तक एक भी किताब नहीं दी गई। जब शिक्षकों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि किताब तो अभी मिली नहीं हैं, मजबूरी में बच्चों को किताबी ज्ञान की बजाय सामान्य ज्ञान की शिक्षा दी जा रही है। प्रधानाचार्या अर्चना रानी ने पुस्तकें उपलब्ध न होने के कारण पढ़ाई बाधित होना बताया। 

यहां भी बुरा हाल
मामेपुर स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में दो शिक्षिकाएं ऑफिस में बैठकर काम कर रही थीं। प्रधानाध्यापिका  सविता यादव ने बताया कि कक्षा आठ के बच्चों को 11 विषयों की किताबें मिलनी चाहिए। जबकि अभी तक नौ विषयों की पुस्तकें ही मिल पाई हैं। खेल व पर्यावरण की पुस्तक अभी स्कूल पहुंची ही नहीं हैं। कक्षा सात में छह किताबें ही मिली हैं, जबकि संस्कृत, मुख्य विषय गणित, गृह शिल्प व कृषि की पुस्तकें नहीं आई हैं। इसके अलावा कक्षा एक से छह तक एक भी पुस्तक नहीं मिली है। स्कूल प्रांगण में कक्षा के बाहर खुले में मिड डे मील बनता मिला। प्रधानाचार्या के मुताबिक स्कूल में रसोई की व्यवस्था नहीं है, इसलिए चूल्हे पर खुले में खाना बनवाना पड़ रहा है। सफाई कर्मी की व्यवस्था भी नहीं है। 
विज्ञापन


सामान्य ज्ञान की शिक्षा दी जा रही
गांव सिखेड़ा प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक अनिल कुमार शर्मा कक्षा से बाहर बरामदे में फर्श पर बैठाकर बच्चों को पढ़ाते मिले। कक्षा में न बैठने का कारण पूछा तो बताया कि वहां पंखे नहीं हैं। गर्मियों की छुट्टी में पंखा व केबल चोरी हो गया था। स्कूल में बिजली ही नहीं है। जब प्रधानाध्यापक कक्ष में पहुंचे तो वहां कुत्ता आराम करता मिला। वहीं अन्य कक्षाओं में बिना किताबों के शिक्षिकाएं सामान्य ज्ञान की शिक्षा देती मिलीं। वहीं परिसर में संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका संगीता रानी ने बताया कि किताबें न होने के कारण शिक्षण कार्य में दिक्कत आ रही है।


15 जुलाई तक पहुंचनी थीं किताबें 
शासन और प्रशासन के दावों पर गौर करें तो सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 15 जुलाई तक सभी पुस्तकें पहुंच जानी चाहिए थीं। लेकिन अब 23 जुलाई बीतने के बाद भी स्कूलों में बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं। 

जल्द किताबें मिलनें की उम्मीद
अभी तक प्रकाशकों से किताबें नहीं मिली हैं। कुछ किताबें प्राइमरी और कुछ कक्षा छह की आई हैं। किताबों को स्कूल भिजवाने का कार्य चल रहा है। बाकी की पुस्तकें शीघ्र ही प्रकाशकों से मिलने की उम्मीद है। सतेंद्र ढाका , बीएसए
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें