उपमुख्य परिवीक्षा अधिकारी ने प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास को राजकीय किशोर संप्रेक्षण गृह के संबंध में अपनी जांच रिपोर्ट भेजी है। जिसमें संप्रेक्षण गृह में स्थायी अधीक्षक की तैनाती के साथ ही किशोरों के आक्रामक रुख को देखते हुए कुछ समय के लिए अस्थायी अतिरिक्त कर्मचारी तैनात करने का सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट में बवाल के पीछे कर्मचारियों की लापरवाही होना भी दर्शाया गया है।
राजकीय संप्रेक्षण गृह में मई में किशोरों ने तीन बार उग्र उपद्रव किया था। जिसमें भारी तोड़फोड़ के बीच पुलिस बल के साथ मारपीट भी की थी। इससे पूर्व भी किशोर बवाल करते रहे हैं। इस मामले को शासन ने गंभीरता से लिया और कई स्तर पर जांच बैठाई।
प्रमुख सचिव महिला एवं बाल कल्याण ने मंडलीय उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी को जांच सौंपी थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि संप्रेक्षण गृह में स्थायी प्रोबेशन अधिकारी नहीं है। जिला प्रोबेशन अधिकारी पुष्पेंद्र का स्थानांतरण होने से बाल गृह के अधीक्षक के पास अतिरिक्त प्रभार रहा, लेकिन वह भी अधिकांश अवकाश पर रहते हैं। ऐसे में संप्रेक्षण गृह में स्थायी प्रोबेशन अधिकारी की तैनाती होना जरूरी है। इस उपद्रव में संप्रेक्षण गृह के कर्मचारियों की लापरवाही जहां सामने आयी है, वहीं किशोरों की संख्या और उनकी उग्रता को देखते हुए यहां पर एक साल के लिए अस्थायी अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति का सुझाव रिपोर्ट में दिया गया है।
शिक्षा के साथ दी जाएगी रोजगार परक ट्रेनिंग
किशोरों की शिक्षा के लिए जो इग्नू केंद्र संचालित है, उसे और बेहतर करने, खेलने की व्यवस्था, भोजन की उचित व्यवस्था जो मानकों के अनुरूप और निर्धारित मैन्यू के आधार पर होगी। इसके साथ ही नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की भी व्यवस्था की जाएगी। किशोरों को अब पूर्ण रूप से सुधार और भविष्य संवारने के लिए रोजगार परक ट्रेनिंग पर भी शासन विचार कर रहा है।