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किसानों को चूना लगाकर उठाया 8 गुना तक मुआवजा   

Sat, 07 Jul 2018 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे तैयार होने से पहले जमीन अधिग्रहण का तीसरा घोटाला पकड़ में आया है। प्रशासन स्तर से कराई गई जांच में खुलासा हुआ है कि रसूलपुर सिकरोड गांव के किसानों को गुमराह कर दलालों ने जमीन खरीदी और फिर अधिग्रहण के वक्त छह से आठ गुना तक का मुआवजा उठाया। मामले में तीन लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से दो के खिलाफ पूर्व में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। तीसरे आरोपी के खिलाफ प्रशासन ने एफआईआर दर्ज करने के लिए थाना कविनगर को लिखा है। 
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इसी वर्ष फरवरी में तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार से एक गोपनीय शिकायत हुई, जिसमें छह किसानों के नाम लिखे गए थे, जिनकी जमीन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए अधिगृहीत की गई है। शिकायतकर्ता ने लिखा कि इन सभी किसानों से जमीन खरीद धारा-3 डी के बाद दलालों ने बाजार मूल्य पर की और फिर अधिग्रहण के वक्त बाजार मूल्य का हवाला देकर छह से आठ गुना तक का मुआवजा उठाया। किसानों को इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई कि उनकी जमीन एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहण की जानी है। मंडलायुक्त ने शिकायत पर डीएम रितु माहेश्वरी को जांच कराने के निर्देश दिए। 23 फरवरी को डीएम ने मामले की जांच सुनील कुमार सिंह एडीएम वित्त को सौंपी। उन्होंने सभी पक्षों के बयान, रिकार्ड व मुआवजे के तौर पर खातों में स्थानांतरित धनराशि तक को देखा, जिसके बाद पूरा घोटाला पकड़ में आया।

इमरान भी निकला घोटाले का ‘खिलाड़ी’ 
विस्तृत जांच के बाद उन्होंने रिपोर्ट में लिखा कि गांव रसूलपुर सिकरोड निवासी किसान फतेह मोहम्मद पुत्र बगद खां को धोखे में रखकर कल्लू गढ़ी डासना के इमरान पुत्र फतेह, इदरीस पुत्र यूसुफ व अखलाक पुत्र ममरेज खां ने 1172 वर्ग मीटर जमीन खरीदी। इसमें से 624.41 मीटर जमीन चंद महीनों के बाद एक्सप्रेस-वे के लिए अधिगृहीत हो गई, जिसके बदले तीनों ने 40 लाख 71 हजार 686 रुपये का मुआवजा उठाया। इसमें से इदरीस पुत्र यूसुफ व अखलाक पुत्र ममरेज खां का नाम पहली जांच में भी सामने आया था। इनके खिलाफ थाना कविनगर में एफआईआर दर्ज कराई गई। जांच के आधार पर डीएम की स्वीकृति के बाद मदन सिंह गर्ब्याल एडीएम भू-अर्जन ने थाना कविनगर को पत्र लिखा है, जिसमें पुलिस को निर्देश दिया गया है कि घोटाले को लेकर पूर्र्व में दर्ज एफआईआर में इमरान पुत्र फतेह का भी नाम जोड़ा जाए। नई जांच रिपोर्ट को विवेचना का हिस्सा बनाया जाए।  चालाकी के साथ किया गुमराह 
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किसान फतेह मोहम्मद की जमीन गांव के खसरा नंबर 5 में ऐसी जगह पर दर्ज थी, जिसका एक हिस्सा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के लिए जा रहा था और दूसरा दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए। लेकिन उस वक्त एडीएम भू-अर्जन कार्यालय की तरफ से किसान को यही जानकारी दी गई कि उसकी जमीन सिर्फ ईस्टर्न पेरिफेरल में जाएगी। बाकी दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस-वे में जा रही जमीन को खरीदने में दलाल जुट गए। उन्होंने बाजार मूल्य पर सौदेबाजी की। जांच में किसान ने इस बाद का उल्लेख किया कि उसे जरा सा भी अहसास नहीं था कि उसकी जमीन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के लिए जाएगी। 

क्या है पुराना घोटाला 
नए जमीन अधिग्रहण कानून के तहत धारा-3डी के बाद कोई भी किसान तीसरे पक्ष को अपनी जमीन नहीं बेच सकता है। लेकिन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे में तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार की तरफ से जांच कराई गई, जिसमें 458 ऐसे बैनामे पकड़े गए, जिनमें जमीन खरीद धारा-3डी के बाद बाजार मूल्य पर हुई। इसमें दलालों के साथ तत्कालीन एडीएम भू-अर्जन घनश्याम सिंह के बेटे शिवांग राठौर, पूर्व आईएएस रनवीर सिंह, पुत्रवधू दिव्या सिंह, अमीन संतोष कुमार की पत्नी लोकेश बेनीवाल, इदरीस पुत्र यूसुफ, ताज मोहम्मद पुत्र ममरेज ने भी जमीन खरीदी और आठ गुना तक मुआवजा लिया। जमीन खरीदने वाले सभी लोगों के खिलाफ पहले से रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है, जिसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। मंडलायुक्त ने जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीएम निधि केसरवानी व विमल शर्मा की भूमिका मानते हुए समुचित कार्रवाई की सिफारिश की थी।

अन्य पहलुओं पर हो रही जांच
जांच में इमरान का नाम सामने आया है। उसके खिलाफ पूर्व में दर्ज रिपोर्ट में नाम शामिल कराया जा रहा है। इसके साथ ही अन्य पहलुओं पर भी जांच की जा रही है। -रितु माहेश्वरी, जिलाधिकारी
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