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चटाई पूजन के साथ किन्नर महासम्मेलन का समापन

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कंकरखेड़ा स्थित गोयल मैरिज होम मे चल रहे किन्नर सम्मेलन के समापन पर बैठक करते हुए किन्नर - फोटो : MODIPURAM
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मेरठ।
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कंकरखेड़ा में आयोजित किन्नर महासम्मेलन का समापन चटाई पूजन और बड़े खाने के साथ हुआ। इस बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। बॉडीवुड और लोकगीतों पर किन्नर जमकर थिरके।
सम्मेलन में कोकिला दिल्ली, बिदामी दिल्ली, शकुंतला चावला मलियाना मेरठ, आपा अलीगढ़, राजकुमारी हापुड़, रवीना दिल्ली सहित उनकी टोली को विमला किन्नर दौराला-कंकरखेड़ा ने भेंट स्वरूप तांबे की परात, प्लेट और लड्डू दक्षिणा में दी। आयोजक किन्नर विमला ने बताया कि इस दौरान कलश यात्रा, चाक पूजन, घट स्थापना, शिव मंदिर में विशेष पूजा की गई। मायरा रस्म, चटाई रस्म, कलश रस्म के साथ किन्नरों को इनाम देकर विदा किया गया। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किन्नरों ने शहर के लोगों को सुख शांति का आशीर्वाद दिया। सैनिकों के लिए विशेष प्रार्थना की।
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कल्पित कथाओं के खुले रहस्य
मेरठ। सम्मेलन में किन्नरों ने बहुत सी कल्पित कथाओं के रहस्यों का खुलासा किया। समाजसेवी किन्नर रिंकी और किन्नर मोहिनी ही कहा कि थर्ड जेंडर को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। जिसमें मृत्यु उपरांत शवों को रात में जलाना, जन्म के तुरंत किन्नर बच्चे को किन्नरों द्वारा जबरन ले जाना आदि हैं। उन्होंने ज्यादातर बातों को समाज द्वारा बुनी हुई कहानी बताया। किन्नर रिंकी ने बताया कि कोई भी अकेले जीवन यापन नहीं कर सकता। किन्नर समाज के साथ हम लोग स्वेच्छा से आते हैं। लोगों का मानना है कि मृत्यु के बाद किन्नर के शव को जूतों से पीटते हुए खड़ाकर ले जाते हैं। किन्नर रिंकी ने बताया कि ऐसा नहीं है। किन्नर जहां रहता है, उसके आसपास के लोग भी शवयात्रा में शामिल होते हैं। किन्नर जिस धर्म को मानता है, उसी पद्धति से उसका अंतिम संस्कार होता है। रिंकी ने बताया कि किन्नर बच्चे को स्वयं उसके माता पिता अपने पास नहीं रखना चाहते। ऐसे में किन्नर समाज ही उसका साथ देता है। समय के साथ किन्नर समाज की प्रथाओं में भी बदलाव आया है।
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